हरचोका में ‘रेत के खेल’ का बड़ा खुलासा, माफिया और पंचायत की जुगलबंदी ने नदी का सीना छलनी किया! राजस्व, वन और खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल; प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा करोड़ों का अवैध कारोबार। सरपंच-उपसरपंच और माफिया का ‘अपवित्र’ गठबंधन

हरचोका में ‘रेत के खेल’ का बड़ा खुलासा, माफिया और पंचायत की जुगलबंदी ने नदी का सीना छलनी किया!

राजस्व, वन और खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल; प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा करोड़ों का अवैध कारोबार।

सरपंच-उपसरपंच और माफिया का ‘अपवित्र’ गठबंधन

[हरचोका/मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर] मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत हरचोका इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यहाँ की नदियों से ‘पीला सोना’ यानी रेत निकालने का काम नियम-कानूनों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे अवैध कारोबार को ग्राम पंचायत के ही सरपंच और उपसरपंच का खुला संरक्षण प्राप्त है।

सरपंच-उपसरपंच और माफिया का ‘अपवित्र’ गठबंधन

विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने रेत माफियाओं के साथ मिलकर एक गुप्त समझौता किया है। बिना किसी वैध अनुमति के रेत माफियाओं को घाटों से रेत उठाने की मौखिक ‘परमिशन’ दे दी गई है। इसके बदले में भारी कमीशन का खेल चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन कंधों पर गांव के संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही अब माफिया के हाथ की कठपुतली बन चुके हैं।
कहां सोया है प्रशासन? विभागों की भूमिका संदिग्ध

हरचोका में चल रहे इस अवैध खेल ने शासन के तीन प्रमुख विभागों को कटघरे में खड़ा कर दिया है:

राजस्व विभाग: सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और अवैध परिवहन को रोकने में यह विभाग पूरी तरह विफल दिख रहा है।

वन विभाग: चूंकि क्षेत्र का बड़ा हिस्सा वन सीमा के करीब आता है, फिर भी विभाग की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। क्या वन अमला भी इस सिंडिकेट का हिस्सा है?

खनिज विभाग: रेत के अवैध खनन से शासन को हर दिन लाखों के राजस्व की हानि हो रही है, लेकिन विभाग की ‘जांच’ केवल फाइलों तक सीमित है।

अंकुश लगाने वाला कोई नहीं, जांच के नाम पर खानापूर्ति

हैरानी की बात यह है कि दर्जनों ट्रैक्टर और हैवी मशीनें दिन-रात नदी का अस्तित्व मिटाने में लगी हैं, लेकिन आज तक किसी भी विभाग ने मौके पर जाकर ठोस जांच नहीं की है। न तो गाड़ियों की जब्ती हो रही है और न ही माफिया पर कोई अंकुश लग रहा है। प्रशासन की यह चुप्पी इस संदेह को पुख्ता करती है कि कहीं नीचे से लेकर ऊपर तक अधिकारी भी इस अवैध कमाई में हिस्सेदार तो नहीं?

ग्रामीणों में भारी आक्रोश

रेत के इस अंधाधुंध उत्खनन से जलस्तर गिर रहा है और आने वाले समय में हरचोका में पर्यावरण का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। क्षेत्रीय ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई और जिम्मेदार सरपंच-उपसरपंच व अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।

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