बालोद : आदिवासी जमीन पर खुलेआम डाका — “समता कॉलोनी” के नाम पर खड़ा हुआ अवैध साम्राज्य, प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी!

शशिकांत सनसनी छत्तीसगढ़ 

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बालोद _छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कर अवैध कॉलोनी खड़ी करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्राम पंचायत दांडी लोहारा क्षेत्र के खसरा नंबर 125 और 145 पर “समता कॉलोनी” नाम से बड़े पैमाने पर गैरकानूनी प्लाटिंग, फर्जी रजिस्ट्री और रकबा बढ़ाकर बिक्री का संगठित खेल सामने आया है।

मुख्य आरोपी कौन?

जमीन कब्जा प्रकरण में जिनके नाम सामने आए हैं, वे हैं—

अनंतराम पिता मदन, निवासी: ग्राम भेड़ी

महेंद्र कुमार पिता अजय, निवासी: मडियाकट्टा

कमलेश जैन पिता मूलचंद, निवासी: डौंडीलोहारा

और पूरा खेल संभव बनाया झाड़ूराम पिता जयलाल ने, जिसने अपनी वास्तविक भूमि से कई गुना ज्यादा रकबा बेचकर पूरे घोटाले को हवा दी।

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कैसे हुआ जमीन का खेल? — रिकॉर्ड खुद गवाही दे रहे

खसरा नंबर 125,वास्तविक रकबा: 0.78 हेक्टेयर,बेचा गया रकबा: 0.88 हेक्टेयर,अवैध अतिक्रमण: 0.10 हेक्टेयर से अधिक

खसरा नंबर 147वास्तविक रकबा: 1.14 हेक्टेयर,बेचा गया रकबा: 1.2334 हेक्टेयर,अवैध अतिक्रमण: 0.09 हेक्टेयर से अधिक

स्पष्ट है — आदिवासी और सरकारी जमीन को फर्जी कागजों, गलत रजिस्ट्रियों और मार्केटिंग के जरिए हड़प लिया गया।

यह पूरा कृत्य धारा 420, 467, 468, 447, 34 भादवि सहित SC/ST एक्ट के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

जांच में सबूत साफ — लेकिन कार्रवाई ज़ीरो

लिखित शिकायत के बाद राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी ने मौके पर जांच की और संयुक्त प्रतिवेदन में पुष्टि की—

अवैध प्लाटिंग,फर्जी रजिस्ट्री,वास्तविक रकबे से अधिक बिक्री,सरकारी/आदिवासी भूमि पर कब्जा,सबकुछ साबित हो चुका है…

लेकिन हैरानी की बात—न FIR,न बुलडोजर,न गिरफ्तारियाँ,न ही अवैध कॉलोनी पर कोई कार्रवाई

प्रशासन ने मानो पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है।

आरोप — “प्रशासन संरक्षण दे रहा है”

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि—

एसडीएम शिवनाथ बघेल

नए तहसीलदार दीपक चंद्राकर

नगर पंचायत के CMO

और संबंधित राजस्व अमला

पूरा तंत्र आरोपियों को बचाने में लगा हुआ है।

लोगों के सवाल तीखे हैं—

जब जांच में सबकुछ साबित है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या मोटी रकम का खेल चल रहा है?”

आदिवासी समाज की चेतावनी — 15 दिन में कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन

आदिवासी संगठन अब पूरी तरह आक्रोश में हैं। उन्होंने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है—

अवैध “समता कॉलोनी” ध्वस्त करो

सभी आरोपियों को गिरफ्तार करो

संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करो

जिला-भर में हजारों आदिवासी सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

जनता का सवाल — आखिर कब मिलेगा न्याय?

लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है—

जहां आदिवासियों के हित की बात होती है, वहीं उनकी जमीन दिनदहाड़े लूटी जा रही है और अधिकारी मौन हैं — क्या यही सुशासन है?”

यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों, शासन की पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

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