शशिकांत सनसनी छत्तीसगढ़

गरियाबंद _छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में महासमुंद के बाद अब गरियाबंद जिले में भी स्कूली परीक्षा के प्रश्न पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
मैनपुर विकासखंड के एक सरकारी स्कूल में आयोजित कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा (इंग्लिश विषय) के प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
क्या है पूरा मामला
प्रश्न पत्र में एक वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछा गया—
“मोना के कुत्ते का क्या नाम है?”
इस प्रश्न के विकल्पों में एक विकल्प के रूप में “राम” नाम लिखा गया था।
जैसे ही यह जानकारी पालकों, स्थानीय नागरिकों और हिंदू संगठनों तक पहुँची, लोगों ने इसे भगवान श्रीराम की आस्था का अपमान बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
हिंदू संगठनों का विरोध
मामले के सामने आते ही हिंदू संगठनों और क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों ने शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए—
जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी
एवं प्रश्न पत्र निर्माण से जुड़े सभी जिम्मेदारों
पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मैनपुर नगर में इस मुद्दे को लेकर पुतला दहन और प्रदर्शन की तैयारी भी की जा रही है।
भगवान श्रीराम का अपमान बर्दाश्त नहीं – योगेश शर्मा
भाजपा गरियाबंद के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पंडित योगेश शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा—
“श्वान के नाम के विकल्प में भगवान श्रीराम का नाम दिया जाना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। यह शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।”
उन्होंने कहा कि—
प्रश्न पत्र प्रकाशन से पहले संपूर्ण जांच जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी होती है
इस लापरवाही से शासन की छवि धूमिल हुई है
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिलकर कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी
कांग्रेस ने भी जताई नाराजगी
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा—
“पालकों के माध्यम से यह मामला सामने आया है। प्रश्न पत्र में भगवान श्रीराम के नाम का आपत्तिजनक उल्लेख किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।”
उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि—
शिक्षा मंत्री से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं
अब तक शासन और सत्ता पक्ष की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है
भगवान श्रीराम हमारे आराध्य हैं, उनके नाम का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
निष्कर्ष
यह मामला अब केवल प्रश्न पत्र की गलती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक आस्था, प्रशासनिक जिम्मेदारी और शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखने वाली बात होगी कि शिक्षा विभाग और राज्य सरकार इस गंभीर विवाद पर क्या कार्रवाई करती है।




