राजनांदगांव : शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री वीरेंद्र चंद्राकर ने लखोली क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लखोली पांच वार्डों में फैला हुआ क्षेत्र है और यहां के सभी वार्डों में भाजपा के पार्षद निर्वाचित हैं लेकिन बच्चों की शिक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य को लेकर जनप्रतिनिधियों की उदासीनता साफ दिखाई दे रही है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि लखोली में तीन-तीन स्कूल संचालित होने के बावजूद अधिकांश पालक अपने बच्चों का प्रवेश वहां कराने के बजाय दूसरे क्षेत्रों के स्कूलों में कराने के लिए मजबूर क्यों हैं। यदि स्थानीय स्कूलों की स्थिति बेहतर होती और वहां का माहौल सुरक्षित होता तो अभिभावकों को अपने घरों से दूर बच्चों को भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कन्हारपुरी स्कूल में प्रवेश को लेकर भारी दबाव की स्थिति बनी हुई है। वहां विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिसके कारण बच्चों के बैठने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। स्कूल में शिफ्ट प्रणाली के तहत पढ़ाई कराई जा रही है फिर भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसके विपरीत लखोली के स्कूलों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध है और शिक्षकों की भी कमी नहीं है।
श्री वीरेंद्र चंद्राकर ने स्पष्ट किया कि पालकों से केवल इतना आग्रह किया गया था कि वे कक्षा छठवीं और नवमी में प्रवेश लेने वाले बच्चों को अपने घर के समीप स्थित लखोली स्कूलों में भेजने पर विचार करें। लेकिन इस सुझाव पर अभिभावकों की प्रतिक्रिया बेहद चिंताजनक रही।उन्होंने बताया कि पालकों का कहना है कि लखोली स्कूलों के आसपास अक्सर शराबियों और नशे के आदी लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। क्षेत्र में असामाजिक और आपराधिक गतिविधियों की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं और इसी कारण वे उन्हें कन्हारपुरी स्कूल में पढ़ाना अधिक सुरक्षित समझते हैं।
श्री चंद्राकर ने कहा कि यह स्थिति स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन दोनों के लिए चिंतन का विषय है। यदि स्कूलों के आसपास का वातावरण सुरक्षित और अनुशासित बनाया जाए तो न केवल लखोली के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी बल्कि पालकों का भरोसा भी मजबूत होगा। उन्होंने मांग की कि स्कूल परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए तथा असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।




