मनेंद्रगढ़ के 220 बिस्तरीय अस्पताल में चमत्कार: 4 बच्चों के हर्निया का सफल ऑपरेशन, 35% झुलसी मासूम को भी मिला जीवनदान रेफर की सलाह के बावजूद डॉ. राजीव गुप्ता और टीम ने अस्पताल में ही संभाला मोर्चा; चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बचाई चार वर्षीय बच्ची की जान

मनेंद्रगढ़ के 220 बिस्तरीय अस्पताल में चमत्कार: 4 बच्चों के हर्निया का सफल ऑपरेशन, 35% झुलसी मासूम को भी मिला जीवनदान

​रेफर की सलाह के बावजूद डॉ. राजीव गुप्ता और टीम ने अस्पताल में ही संभाला मोर्चा; चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बचाई चार वर्षीय बच्ची की जान

एमसीबी, मनेंद्रगढ़।

मनेंद्रगढ़ के 220 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में मंगलवार को चिकित्सकों की दक्षता, सेवा भावना और अद्वितीय समर्पण का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला। अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और चिकित्सकीय कौशल से पांच गंभीर बाल मरीजों का न सिर्फ सफल उपचार और ऑपरेशन किया, बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी दिया।

​अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन मरीजों में 5 से 10 वर्ष की आयु के चार बच्चे शामिल थे, जिनका हर्निया का सफल ऑपरेशन किया गया। वहीं, एक अन्य मामले में करीब 35 प्रतिशत तक झुलस चुकी चार वर्षीय मासूम बच्ची का भी सफल बर्न मैनेजमेंट कर उसकी जान बचाई गई। समाचार लिखे जाने तक सभी पांचों बच्चों की स्थिति पूरी तरह सामान्य और स्वास्थ्य में लगातार सुधार बताया जा रहा है।

​परिजनों की जिद और डॉक्टरों का हौसला आया काम

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चुनौतीपूर्ण मामला 35 प्रतिशत तक झुलसी चार वर्षीय मासूम बच्ची रोशनी का था। प्राथमिक जांच के बाद जनरल सर्जन डॉ. राजीव गुप्ता ने सीमित संसाधनों को देखते हुए बच्ची को बेहतर बर्न मैनेजमेंट सुविधा वाले किसी उच्च चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) में रेफर करने की सलाह दी थी।

​”बच्ची की स्थिति काफी गंभीर थी, लेकिन परिजनों ने बाहर जाने से साफ इनकार कर दिया और इसी अस्पताल में ही उपचार कराने का करबद्ध आग्रह किया।”

अस्पताल सूत्र

 

​परिजनों की इच्छा और बच्ची की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉ. राजीव गुप्ता ने चुनौती को स्वीकार किया और अपनी पूरी टीम के साथ तत्काल उपचार प्रारंभ किया। चिकित्सकों की निरंतर निगरानी, वैज्ञानिक उपचार पद्धति और समन्वित प्रयासों से चमत्कार हुआ और बच्ची की हालत में तेजी से सुधार आया। चिकित्सकों की इस कड़ी मेहनत ने आखिरकार मासूम को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।

​हर्निया के चार सफल ऑपरेशन, भविष्य की जटिलताओं से राहत

​इसी दौरान अस्पताल के डॉक्टरों ने 5 से 10 वर्ष की आयु के चार अन्य बच्चों के हर्निया के जटिल ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक संपन्न किए। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों में हर्निया का समय पर ऑपरेशन होना बेहद जरूरी होता है; इससे उन्हें भविष्य में होने वाली गंभीर शारीरिक जटिलताओं से हमेशा के लिए राहत मिल गई है। इस बड़ी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि मनेंद्रगढ़ का यह जिला अस्पताल अब गंभीर और जटिल सर्जिकल मामलों को संभालने में पूरी तरह सक्षम हो चुका है।

​उपलब्ध संसाधनों का हो रहा है बेहतर उपयोग: डॉ. स्वप्निल तिवारी

​अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा:

​”मनेंद्रगढ़ चिकित्सालय में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर से बेहतर उपयोग करते हुए मरीजों को हर संभव उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, आधुनिक उपकरणों एवं समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से आज गंभीर से गंभीर मरीजों का सफल उपचार यहीं संभव हो पा रहा है। भविष्य में भी क्षेत्र की जनता को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

 

​सफल उपचार पाने वाले मरीजों की सूची (रजिस्टर के अनुसार):

​अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, जिन बच्चों को नया जीवन मिला है उनके नाम निम्नलिखित हैं:

मरीज का नाम

बीमारी / समस्या

रोशनी

लगभग 35 प्रतिशत बर्न (झुलसना)

रामचरण

जनरल हाइड्रोसील

प्रियंका

दायां इंगुइनल हर्निया

सलीमन

दायां इंगुइनल हर्निया

सहमय / सोमेश

दायां इंगुइनल हर्निया

इस टीम ने रचा इतिहास

​इस सामूहिक सफलता के पीछे अस्पताल के अनुभवी चिकित्सकों और ऑपरेशन थिएटर (OT) स्टाफ की चौबीसों घंटे की कड़ी मेहनत रही।

  • चिकित्सक टीम: डॉ. राजीव गुप्ता (जनरल सर्जन), डॉ. एल. पी. मराबी (एनेस्थेटिस्ट), डॉ. फिरोज शेख (एनेस्थेटिस्ट)।
  • ओटी स्टाफ: पुष्पा पटेल (ओटी इंचार्ज), प्रियंका साहू, मुकेश शर्मा, आकांक्षा जायसवाल, संजय द्विवेदी।

​क्षेत्रवासियों में बढ़ा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा

​इस सफल और जटिल इलाज के बाद क्षेत्रवासियों में जिला चिकित्सालय के प्रति विश्वास और भी ज्यादा मजबूत हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मनेंद्रगढ़ के इस अस्पताल में अब बच्चों के जटिल ऑपरेशन और गंभीर मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही मिल रहा है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अब इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा है, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बड़ी बचत हो रही है।

 

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