मनेंद्रगढ़ में तिरंगा यात्रा पर राजनीतिक संग्राम: स्कूली बच्चों को शामिल करने व राष्ट्रध्वज से ऊपर संगठन का झंडा फहराने पर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने खोला मोर्चा, प्रशासन से मांगा जवाब

मनेंद्रगढ़ में तिरंगा यात्रा पर राजनीतिक संग्राम: स्कूली बच्चों को शामिल करने व राष्ट्रध्वज से ऊपर संगठन का झंडा फहराने पर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने खोला मोर्चा, प्रशासन से मांगा जवाब

मनेंद्रगढ़

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा आयोजित तिरंगा यात्रा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब व्यापक राजनीतिक रूप ले चुका है। भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस आयोजन में भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) के कथित उल्लंघन और शैक्षणिक सत्र के दौरान स्कूली बच्चों के इस्तेमाल पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय अस्मिता का अपमान बताते हुए राज्य सरकार, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ सीधा हमला बोला है।

​क्या है पूरा मामला? विस्तृत विवरण

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनेंद्रगढ़ शहर के प्रमुख मार्गों से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से एक तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। यात्रा का मुख्य उद्देश्य देशभक्ति का संदेश देना बताया गया था, लेकिन आयोजन के दौरान दो प्रमुख बिंदुओं पर भारी अनियमितता और लापरवाही के आरोप लगे:

  1. यूनिफॉर्म में नाबालिग छात्र-छात्राएं: शिक्षण कार्य के तय घंटों (स्कूल टाइम) के दौरान ही कई सरकारी एवं निजी विद्यालयों के बच्चों को उनकी स्कूल ड्रेस (यूनिफॉर्म) में इस यात्रा में शामिल कराया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कड़कड़ाती धूप में नाबालिग बच्चे संगठन के झंडे और बैनर थामे रैलियों में चलते नजर आए।
  2. राष्ट्रीय ध्वज से ऊपर संगठन का झंडा: यात्रा के दौरान जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, उनमें आरोप है कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) से भी अधिक ऊंचाई पर एबीवीपी का संगठनात्मक झंडा लहराया जा रहा था। ध्वज संहिता के अनुसार, तिरंगे के ऊपर या उसके समानांतर किसी भी राजनीतिक या संगठनात्मक ध्वज को इस तरह से प्रदर्शित करना सख्त मना है।

​इन तस्वीरों के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम नागरिकों और अभिभावकों के बीच भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

​पूर्व विधायक गुलाब कमरो का कड़ा प्रहार: “यह राष्ट्रध्वज का अपमान और प्रशासनिक नाकामी”

​मामले की जानकारी मिलते ही पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने एक प्रेस वार्ता और आधिकारिक बयान जारी कर सत्तापक्ष व स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।

पूर्व विधायक गुलाब कमरो के मुख्य बिंदु:

  • राष्ट्रध्वज के सम्मान से कोई समझौता नहीं: “तिरंगा भारत की आन, बान और शान का प्रतीक है। इसके गौरव की रक्षा के लिए हमारे देश के वीर जवानों ने अपने प्राण न्योछावर किए हैं। यदि किसी संगठन का झंडा तिरंगे से ऊपर फहराया जाता है, तो यह ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ और ‘भारतीय ध्वज संहिता’ का खुला उल्लंघन है। इस तरह का कृत्य देश की भावना को ठेस पहुँचाता है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
  • शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका पर सवाल: “मैं जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से सीधा जवाब चाहता हूँ—किसके लिखित आदेश या अनुमति से मासूम बच्चों को पढ़ाई का समय छोड़कर किसी संगठनात्मक रैली का हिस्सा बनाया गया? क्या स्कूलों का इस्तेमाल अब राजनीतिक और संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन के लिए किया जाएगा?”
  • सत्तापक्ष पर तीखा हमला: “भाजपा और उससे जुड़े अनुषांगिक संगठन अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए स्कूली बच्चों को ढाल बनाना बंद करें। बच्चों का सही स्थान स्कूल की कक्षाएँ और उनके हाथ में किताबें होनी चाहिए, न कि किसी संगठन के झंडे।”

 

​प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों पर उठे 5 बड़े सवाल

​इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग, अभिभावकों और कानून विशेषज्ञों द्वारा कई महत्वपूर्ण कानूनी और नैतिक सवाल खड़े किए जा रहे हैं:

क्र.

जांच और समीक्षा का विषय

उठाए गए प्रमुख प्रश्न

1

ध्वज संहिता का उल्लंघन

क्या राष्ट्रध्वज से ऊपर संगठन का झंडा फहराने के मामले में आयोजकों पर National Honour Act के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी?

2

स्कूल प्रमुखों की जवाबदेही

क्या संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों/शिक्षकों ने बच्चों को रैली में भेजने के लिए शिक्षा विभाग या अभिभावकों से अनुमति ली थी?

3

बाल अधिकारों का हनन

स्कूल समय के दौरान नाबालिग बच्चों को गैर-शैक्षणिक और संगठनात्मक अभियानों में ले जाना क्या बाल अधिकार संरक्षण मानकों का उल्लंघन नहीं है?

4

सुरक्षा व प्रशासनिक लापरवाही

इतनी बड़ी रैली के दौरान स्कूली बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा किसका था? यदि कोई दुर्घटना घटित होती तो उत्तरदायी कौन होता?

5

प्रशासनिक निष्पक्षता

क्या जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा या दबाव के चलते मामले को दबा दिया जाएगा?

क्षेत्र में गरमाया सियासी माहौल: आगे की रणनीति

​इस मुद्दे को लेकर मनेंद्रगढ़ सहित पूरे भरतपुर-सोनहत क्षेत्र का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने इस विषय पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है।

​पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग 24 से 48 घंटों के भीतर इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी आयोजकों एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करता है, तो वे आम जनता और अभिभावकों को साथ लेकर जिला मुख्यालय के समक्ष उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

​आधिकारिक पक्ष का इंतजार

​फिलहाल इस विवाद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के स्थानीय पदाधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारी और मनेंद्रगढ़ कलेक्टर की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में जांच कमेटी गठित करता है या इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप मानकर टालने का प्रयास करता है।

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