पोंड़ी-बचरा में कल लगेगा बड़ा दिव्यांगता शिविर, 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के बनेंगे प्रमाण-पत्र
- मेडिकल बोर्ड रहेगा मुस्तैद, नए और नवीनीकरण के मामलों का होगा ऑन-द-स्पॉट निपटारा

बैकुंठपुर/पोंड़ी-बचरा:
ज़िले के दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से प्रशासन एक बड़ी पहल करने जा रहा है। आगामी 25 जून (गुरुवार) को ग्राम पंचायत पोंड़ी स्थित सर्व आदिवासी भवन में एक विशाल दिव्यांगता प्रमाण-पत्र शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में 21 अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगताओं के नए प्रमाण-पत्र बनाने के साथ-साथ पुराने प्रमाण-पत्रों के नवीनीकरण (रिन्यूअल) का कार्य भी किया जाएगा।
समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा (TL) की बैठक में कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के समक्ष इस शिविर का प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर उन्होंने तत्काल सहमति प्रदान की। यह शिविर विशेष रूप से तहसील पोंड़ी-बचरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के दिव्यांगों की सुविधा को ध्यान में रखकर लगाया जा रहा है, ताकि उन्हें दूर न जाना पड़े। शिविर में जिला मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ डॉक्टर सुबह 10 बजे से उपस्थित रहेंगे, जो दिव्यांगजनों का मौके पर ही परीक्षण कर पात्र हितग्राहियों के प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। विभाग ने सभी पात्र दिव्यांगों और उनके परिजनों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ पहुँचकर इस सुविधा का लाभ उठाएं।
2. ‘पीएम सूर्यघर’ और ‘बिहान’ के मेल से ग्रामीण महिलाओं की चमकेगी किस्मत
- कार्यशाला में सोलर दीदियों ने रखे 46 नए प्रस्ताव, हर केस पर मिलेगा 8 से 10 हजार का इंसेंटिव
कोरिया:
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला पंचायत के मंथन सभागार में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ‘सोलर दीदियों’ की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में ‘प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर रणनीति बनाई गई।
इस अभिसरण (Convergence) का मुख्य उद्देश्य सोलर दीदियों के माध्यम से गांव-गांव तक मुफ्त बिजली योजना का लाभ पहुंचाना और महिलाओं के लिए आजीविका के नए स्रोत खोलना है। योजना के तहत स्वीकृत होने वाले प्रत्येक मामले पर सोलर दीदियों को 8,000 से 10,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। वर्तमान में ज़िले में 66 सोलर दीदियां सक्रिय हैं, जिन्होंने कार्यशाला के दौरान 46 नए प्रकरण प्रस्तावित किए हैं। कार्यक्रम में मौजूद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के अधिकारियों ने तकनीकी शंकाओं का समाधान किया। जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि सोलर दीदियां ग्रामीणों के बिजली बिल को शून्य करने और पर्यावरण संरक्षण में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही हैं।
3. मनरेगा की ‘आजीविका डबरी’ से बदलेगी किसान नवलसाय और पर्वतिया के जिंदगी के दिन
- जल संरक्षण के साथ मछली पालन से सालाना होगी 1 लाख रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त कमाई
सोनहत/नटवाही:
कहते हैं कि अगर किसान को सिंचाई का सही साधन मिल जाए, तो उसकी मेहनत सोना उगल सकती है। इसी सोच को सच कर रही है कोरिया जिले में निर्मित हो रही ‘आजीविका डबरियां’। ज़िले में अब तक 100 से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण पूरा हो चुका है, जो जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की समृद्धि का जरिया बन रही हैं। इसी कड़ी में सोनहत जनपद के ग्राम नटवाही निवासी किसान नवलसाय और उनकी पत्नी पर्वतिया के खेत में बनी आजीविका डबरी इस मानसून में उनकी किस्मत बदलने को तैयार है।
’बिहान’ योजना से जुड़ी महिलाओं को मालिकाना हक और आर्थिक मजबूती देने के लिए यह डबरियां उन्हीं के नाम पर स्वीकृत की जा रही हैं। मनरेगा के तहत 25 मीटर लंबी, 25 मीटर चौड़ी और 3 मीटर गहरी बनाई गई इस डबरी में करीब 2500 घनमीटर पानी रोकने की क्षमता है, जिससे दो एकड़ खेत में साल में दो फसलें आसानी से ली जा सकेंगी। इसके साथ ही, मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से इसमें मछली पालन भी शुरू किया जाएगा। हितग्राही दंपत्ति पर्वतिया और नवलसाय ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि निर्माण के दौरान ही इसमें पानी रुकना शुरू हो गया था। उन्हें उम्मीद है कि पहली ही बारिश में डबरी भरने के बाद वे मछली पालन से सालाना 1 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे।




