स्व. बिंदेश्वरी बघेल शासकीय महाविद्यालय कुम्हारी
कुम्हारी -: सविधान दिवस के अवसर पर महाविद्यालय में भारतीय संविधान की समकालीनता विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ सभी शिक्षकों एवं छात्रों द्वारा प्रस्तावना के प्रति शपथ लेने के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो डॉ अमृता कस्तूरे ने कहा कि भारतीय संविधान बृहद होते हुए भी बहुत लचीला है और यही इसे हमेशा समकालीन बनाए रखता है।

अब तक कुल 94 संशोधन समकालीनता का परिचायक है। संविधान हमें अनेक अधिकार एवं कर्तव्य के प्रति जागरूक करता है और हमें इस बात की भी आजादी देता है कि हमेशा इस पर आलोचनात्मक ढंग से विचार कर सके। हम सभी को अपने संविधान की मूल आत्मा को बचाएं रखते हुए उसके प्रति गहरी आस्था एवं सम्मान बचाए रखना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ विनोद शर्मा ने कहा कि उत्तर औपनिवेशिक विमर्श के इसकाल
में हमें संविधान समकालीनता पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में शामिल तत्व जो औपनिवेशिक शक्ति अंग्रेजों द्वारा पास एक्ट के रूप में हैं उन पर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, भारतीय दृष्टिकोण से विचार की आवश्यकता है।
डॉ भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 को संबोधित संविधान सभा के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस बात की चेतावनी दी थी की राजनीतिक स्वतंत्रता का तब तक कोई अर्थ नहीं जब तक सामाजिक एवं आर्थिक रूप से हम एक स्वतंत्र एवं समान धर्मी लोकतंत्र नहीं गढ़ते। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि धर्म में भक्ति का स्थान है पर लोकतंत्र में नहीं अतः नायक पूजा की प्रथा कभी आएगी तो वह लोकतंत्र को तानाशाही में बदल देगी।
सभा को संबोधित करते हुए प्राध्यापिका श्रीमती कल्पना पांडे ने कहा की भारतीय संविधान हमें स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है। इसके मौलिक अधिकारों की रक्षा करना एवं अपना संवैधानिक कर्तव्य का पालन करना आवश्यक है
सभा का संचालन करते हुए राजनीति शास्त्र की व्याख्याता
नूसरत जहां ने सविधान की विभिन्न विशेषताओं की जानकारी दी। उसके अनुच्छेद मौलिक अधिकार एवं नीति निर्देशक तत्व की विस्तृत चर्चा की थी।
चर्चा में छात्र-छात्राओं ने भी उत्साह के साथ भाग लिया बीकॉम की छात्रा नेहा,पवन सिंह एवं आशीष ने जहां भारतीय संविधान के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला वही बीए की छात्रा हिना साहू एवं ऋतु ने भी संविधान की विभिन्न अनुच्छेदों की चर्चा की।
ऋतु ने खूबसूरत ढंग से प्रस्तुति देते हुए मौलिक अधिकारों के संबंध में चर्चा की।
गोष्टी के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अंग्रेजी की व्याख्याता डॉली सोनी ने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि जिस देश का संविधान अच्छा है और पालन करने वाले बुरे हो तो संविधान की अच्छाई खत्म हो जाती हैं ।




