आंदोलनरत पँचायत सचिवों को मिल रहा है जनप्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं का जनसमर्थन
शासकीयकरण के भरोषे के साथ आंदोलन का 43 वां दिन – महेन्द्र साहू
पाटन/छत्तीसगढ़ सचिव संगठन के आह्वान पर दुर्ग जिला सहित पर पाटन ब्लॉक के पंचायत सचिव अपनी एक सूत्रीय मांग परिवीक्षावधि पश्चात शासकीयकरण को लेकर भरोषे के साथ आंदोलन के 43 वे दिन गुरुवार 27 अप्रैल को जनपद पंचायत पाटन धरना स्थल पर क्रमिक भूख हड़ताल कर रहे है आंदोलन को समर्थन देने के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश जिला जनपद लिपिकवर्गीय संघ के प्रांताध्यक्ष व जिला साहू संघ दुर्ग के सम्माननीय अध्यक्ष श्री नंदलाल साहू ने पँचायत सचिवों के मांगो का समर्थन करते हुए, पाटन के लाडला विधायक व यशश्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से निवेदन किया कि पँचायत सचिवों के मांग जायज है व आपके द्वारा दिए गए आश्वासन को पूर्ण करते हुए मांग अतिशीघ्र पूर्ण किया जाय।
उक्त आंदोलन को छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के किसान रथ में पहुचे प्रख्यात पंडवानी गायक व सामाजिक कार्यकर्ता श्री चेतन देवांगन, श्री लालाराम वर्मा, कवि श्री बिसरू राम कुर्रे ने समर्थन करते हुए कहा कि गरीब किसान के पुत्र पँचायत सचिवो ने केन्द्र व राज्य सरकार के सभी योजनाओं को सफल बनाने वाले पँचायत सचिवों के मांगो को अतिशीघ्र पूर्ण करने माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया
व आन्दोल स्थल पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री गौरीशंकर श्रीवास ने समर्थन करते हुए कहा कि पँचायत सचिवों की मांग जायज है और अतिशीघ्र पूर्ण किया जाय व पँचायत सचिवों के ऊपर सरकार दमनात्मक कार्यवाही करती है तो भारतीय जनता पार्टी इनके साथ मांग को पूर्ण कराने आंदोलन पर उतरेंगे ।
गौरतलब है कि पंचायत सचिवों के आंदोलन से ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं बाधित हुई है, विकास कार्य पूर्ण रूप से ठप पड़े हैं मुख्यमंत्रीजी की ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा गरवा घुरुवा बारी के कार्य बंद पड़े हैं।
पंचायत सचिव संघ के ब्लाक अध्यक्ष नरेश सिंह राजपूत का कहना है कि शासन प्रशासन द्वारा अभी तक आंदोलन को लेकर किसी प्रकार का कोई पहल नहीं किया है, जिसके चलते ग्रामीणजन परेशान हो रहे हैं, पंचायत सचिवों के आंदोलन को विभिन्न कर्मचारी संगठनों का समर्थन प्राप्त हो रहा है।
पंचायत सचिव संघ के जिलाध्यक्ष महेन्द्र कुमार साहू ने बताया कि शांतिपूर्ण आंदोलन को 43 दिन हो गया है पर शासन प्रशासन किसी भी प्रकार से सुध नही ले रहे है जिससे संगठन में नाराजगी है, आगे आंदोलन को और उग्र किया जायेगा व भूख हड़ताल आमरण अनशन, जेल भरो आंदोलन किया जायेगा, जिसके लिए शासन प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होंगे।




