आंगनबाड़ी भर्ती में ‘खेल’: ज्यादा अंक वाले बाहर, कम नंबर वालों का चयन; मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभाग पर गंभीर आरोप
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने खोला मोर्चा; कहा- जांच नहीं हुई तो राज्य स्तर पर होगी शिकायत, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

मनेंद्रगढ़/एमसीबी।
छत्तीसगढ़ के नवगठित मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा हाल ही में संपन्न की गई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भर्ती में कथित अनियमितताओं, अपात्रों को लाभ पहुंचाने और भारी पक्षपात के आरोपों ने अब प्रदेश में राजनीतिक रंग ले लिया है। इस मामले के सामने आने के बाद सीधे तौर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई पीड़ित महिला आवेदकों ने कलेक्टर से लिखित शिकायत कर पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने, निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
मेरिट दरकिनार, नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप
कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने वाली महिला अभ्यर्थियों में आरती (चैनपुर), कुसुम कली (सिरौली), मीना सिंह (बुंदेली), सुमित्रा (सिरौली), रामवती (परसगढ़ी) एवं संजुबाई (शंकरगढ़) सहित अन्य कई अभ्यर्थी शामिल हैं।
पीड़ित महिलाओं का सीधा और स्पष्ट आरोप है कि विभाग द्वारा अंतिम दावा-आपत्ति सूची जारी होने के बाद भी भारी हेरफेर किया गया। कई केंद्रों पर अधिक अंक (हायर मेरिट) प्राप्त करने वाले योग्य अभ्यर्थियों को जानबूझकर चयन से वंचित कर दिया गया, जबकि उनसे काफी कम अंक पाने वाले चहेते उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी गई।
जाति और गरीबी रेखा के बोनस अंकों में ‘हेराफेरी’
आवेदकों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ मामलों में तय नियमों के मुताबिक मिलने वाले अंक भी नहीं दिए गए। छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के जाति प्रमाण पत्र एवं गरीबी रेखा (BPL) सूची के आधार पर अभ्यर्थियों को निर्धारित बोनस अंक मिलने थे, लेकिन स्क्रूटनी के दौरान पात्र महिलाओं के इन दस्तावेजों को नजरअंदाज कर दिया गया ताकि उन्हें मेरिट से बाहर किया जा सके। महिलाओं ने मांग की है कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और वास्तविक तथ्यों के साथ दोनों सूचियों को सार्वजनिक किया जाए।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने साधा निशाना, आंदोलन की चेतावनी
इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर पीड़ित आवेदकों ने क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। पूर्व विधायक ने महिलाओं की शिकायतों को बेहद गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन को आड़े हाथों लिया।
गुलाब कमरो ने महिला एवं बाल विकास विभाग पर सीधा निशाना साधते हुए कहा:
”एमसीबी जिले में जब से भाजपा की सरकार आई है, महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में रही है। विभागीय अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, संविदा भर्ती और अब गरीब महिलाओं के रोजगार से जुड़ी आंगनबाड़ी भर्ती जैसे मामलों में भी पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।”
कमरो ने चेतावनी देते हुए कहा कि विभागीय मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के गृह संभाग (सरगुजा) में ही अगर उनकी नाक के नीचे ऐसा भ्रष्टाचार हो रहा है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र ही इस भर्ती पर रोक लगाकर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की, तो वे इस मामले को राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री और राजभवन तक उठाएंगे तथा जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड कराने के लिए उग्र आंदोलन करेंगे।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभाग की साख दांव पर
गौरतलब है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की कमान इस समय कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के हाथों में है, जो खुद इसी संभाग से आती हैं। विभाग की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर पहले भी कई जिलों से शिकायतें और जांच की मांग उठती रही है, लेकिन एमसीबी जिले में आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर सामने आए इन नए और पुख्ता आरोपों ने सीधे तौर पर मंत्री के विभाग की साख और सुशासन के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
फिलहाल, पीड़ित महिलाओं के आक्रोश और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच अब पूरे प्रदेश की निगाहें एमसीबी जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हुई हैं। देखना होगा कि गरीब और पात्र महिलाओं को उनका हक मिलता है या अधिकारी इस मामले को दबाने में कामयाब होते हैं।




