शिक्षा व्यवस्था में बड़ा फर्जीवाड़ा: प्रदेश के 43 नर्सिंग कॉलेजों के पास INC की उपयुक्तता ही नहीं; 3,400 से अधिक छात्रों के भविष्य पर मंडराया अंधकार अधिकारियों की साठगांठ या लाचारी? नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले संस्थानों को कार्रवाई के बजाय सिर्फ थमाए गए ‘फॉर्मेलिटी नोटिस’

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा फर्जीवाड़ा: प्रदेश के 43 नर्सिंग कॉलेजों के पास INC की उपयुक्तता ही नहीं; 3,400 से अधिक छात्रों के भविष्य पर मंडराया अंधकार

​अधिकारियों की साठगांठ या लाचारी? नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले संस्थानों को कार्रवाई के बजाय सिर्फ थमाए गए ‘फॉर्मेलिटी नोटिस’

 

हजारों छात्रों के साथ बड़ा धोखा: इन 43 कॉलेजों की डिग्रियां और अंकसूचियां छत्तीसगढ़ के बाहर ‘रद्दी का टुकड़ा’, दूसरे राज्यों व विदेशों में पूरी तरह अमान्य

रायपुर | डीबी स्टार

​छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में धड़ल्ले से चल रहे निजी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और उनकी विश्वसनीयता पर ऐसा गंभीर सवाल खड़ा हुआ है, जिसने सीधे तौर पर हजारों परिवारों और छात्रों की नींद उड़ा दी है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय, स्वास्थ्य विश्वविद्यालय और छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (CGNRC) के ही गोपनीय और आधिकारिक दस्तावेज यह साबित कर रहे हैं कि प्रदेश के 43 निजी नर्सिंग कॉलेजों के पास भारतीय नर्सिंग परिषद (INC), नई दिल्ली का उपयुक्तता प्रमाण पत्र (Suitability Certificate) मौजूद ही नहीं है।

​इसके बावजूद इन संदिग्ध और बिना मानक वाले संस्थानों में बेधड़क दाखिले लिए जा रहे हैं, लाखों रुपये की फीस वसूली जा रही है और कागजी डिग्रियां बांटी जा रही हैं। डीबी स्टार की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम ने जब सीधे भारतीय नर्सिंग परिषद से संपर्क साधा, तो चौंकाने वाला सच उजागर हुआ। INC अधिकारियों के मुताबिक—जिन कॉलेजों के पास उपयुक्तता प्रमाण पत्र नहीं है, वे भले एडमिशन ले लें, लेकिन उनकी जारी की गई डिग्री केवल छत्तीसगढ़ की सीमाओं के भीतर सिमट कर रह जाएगी। राज्य से बाहर निकलते ही या विदेश में नौकरी के आवेदन पर यह अंकसूची पूरी तरह अमान्य (Invalid) साबित होगी।

​आंकड़ों की खौफनाक तस्वीर:

  • राज्य में कुल स्वीकृत नर्सिंग संस्थान: 124
  • कुल स्वीकृत सीटें: 7,216
  • INC से वैध उपयुक्तता वाले संस्थान: मात्र 80
  • बिना उपयुक्तता अवैध रूप से संचालित संस्थान: 43
  • भविष्य के दांव पर लगे छात्र (सीटें): 3,416

​मानकों की बलि चढ़ाकर चल रही ‘शिक्षा की दुकानें’

​INC का उपयुक्तता प्रमाण पत्र कोई मामूली कागजी दस्तावेज नहीं है। यह इस बात का एकमात्र सरकारी प्रमाण है कि कॉलेज के पास खुद का सर्वसुविधायुक्त भवन, योग्य और पर्याप्त प्रोफेसर्स, क्लिनिकल प्रैक्टिस के लिए अपना अस्पताल और प्रैक्टिकल के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा मौजूद है। 43 कॉलेजों के पास इस सर्टिफिकेट का न होना साफ इशारा करता है कि ये संस्थान केवल ‘कागजी ढांचे’ पर खड़े हैं और छात्रों को घटिया व बिना मानकों वाली शिक्षा परोसी जा रही है।

​स्वास्थ्य विभाग में ही असमंजस: सीटों के खेल में बड़ा झोल

​इन्वेस्टिगेशन में निकला सबसे सनसनीखेज दस्तावेज 19 सितंबर 2025 का है। इस पत्राचार में स्वयं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जवाब मांगा था कि—कॉलेजों में सीटों की संख्या में अचानक यह बड़ा अंतर कैसे आया? क्या INC के नियमों को ताक पर रखकर सीटें बढ़ाई गईं? शासन से अनुमति ली गई या नहीं और किस आधार पर निरीक्षण पास कर दिया गया? यह पत्र साबित करता है कि विभाग के भीतर ही सीटों और मान्यताओं का एक बड़ा और संदिग्ध खेल चल रहा है।

​अल्टीमेटम बीता, लेकिन साठगांठ के चलते कार्रवाई ‘ज़ीरो’

​29 जनवरी 2024 को चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने INC को पत्र भेजकर खुद माना था कि 124 में से केवल 80 संस्थानों के पास ही उपयुक्तता है। इसके बाद 4 अप्रैल 2024 को पं. दीनदयाल उपाध्याय स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने सभी डिफ़ॉल्टर कॉलेजों को 6 महीने का कड़ा अल्टीमेटम दिया था कि यदि उपयुक्तता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया, तो अगले सत्र में संबद्धता (Affiliation) पूरी तरह रद्द कर दी जाएगी।

​लेकिन हैरत की बात यह है कि समयसीमा खत्म हुए महीनों बीत चुके हैं, फिर भी न तो किसी कॉलेज पर ताला लगा, ना ही संबद्धता रद्द हुई और ना ही डिफ़ॉल्टर कॉलेजों के नाम सार्वजनिक किए गए। सिर्फ कागजी नोटिस जारी कर खानापूर्ति की जाती रही।

​3 तीखे सवाल, जिनका जवाब शासन को देना होगा:

    1. छात्रों के खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन? 3,416 बेकसूर छात्रों और उनके माता-पिता की गाढ़ी कमाई के रुपयों और उनके करियर की बर्बादी की जवाबदेही किसकी है?
    2. ब्लैकलिस्ट करने से परहेज क्यों? जब 6 महीने की तय मियाद खत्म हो चुकी थी, तो इन 43 कॉलेजों की मान्यता तुरंत प्रभाव से रद्द कर उन्हें सार्वजनिक रूप से ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया?
    3. गोपनीयता के पीछे कौन सा खेल? आम जनता और एडमिशन लेने वाले छात्रों से इन 43 अवैध कॉलेजों की सूची क्यों छिपाई जा रही है?

जिम्मेदार का गोलमोल जवाब:

“पदभार संभालने के बाद मैं पुराने पेंडिंग मामलों को प्राथमिकता से निपटा रही हूँ। यह सच है कि 43 कॉलेजों का उपयुक्तता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं है। इस संबंध में कॉलेजों से स्पष्टीकरण और जानकारी मांगी जाएगी। नियमानुसार अर्थदंड (Fine) लगाने का प्रावधान है।”

— लक्ष्मी साहू, रजिस्ट्रार, नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल, छत्तीसगढ़

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