न्यू लाईफ’ के विद्यार्थियों ने सीखे राहत एवं बचाव के गुर, झुमका जलाशय में राज्य स्तरीय बाढ़ आपदा अभ्यास
मॉकड्रिल में समझी आपदा प्रबंधन की बारीकियां; रेस्क्यू से लेकर प्राथमिक उपचार तक का हुआ जीवंत प्रदर्शन

बैकुंठपुर
बैकुंठपुर: जब प्रकृति अपना रौद्र रूप धारण करती है और शांत बहती जलधारा देखते ही देखते जीवन के लिए संकट बन जाती है, तब घबराहट नहीं, बल्कि सजगता, साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और सुनियोजित तैयारी ही मानव जीवन की सबसे बड़ी ढाल बनती है। इसी जीवन-मंत्र को आत्मसात कराने के उद्देश्य से बैकुंठपुर के प्रसिद्ध झुमका जलाशय क्षेत्र में राज्य स्तरीय बाढ़ आपदा प्रशिक्षण एवं मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। इस विशेष अभ्यास में ‘न्यू लाईफ’ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित ‘न्यू लाईफ’ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, बैकुंठपुर के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कर आपदा प्रबंधन की व्यावहारिक बारीकियां सीखीं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) गृह मंत्रालय भारत सरकार, छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कोरिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पूर्वाभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित आपदा के समय राहत एवं बचाव व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाना और विभिन्न शासकीय विभागों व स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच समन्वय की क्षमता को परखना रहा।
जल प्रलय की परिस्थिति के बीच जीवंत रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन
झुमका जलाशय के विशाल जलक्षेत्र में आयोजित इस मॉकड्रिल के दौरान वास्तविक आपदा की स्थिति निर्मित कर बचाव कार्यों का क्रमबद्ध और अत्यंत प्रभावी प्रदर्शन किया गया। नर्सिंग विद्यार्थियों को यह दिखाया और समझाया गया कि आपदा के विषम क्षणों में एक-एक सेकंड कितना मूल्यवान होता है।
- मोटर बोट व आधुनिक उपकरणों से रेस्क्यू: तेज जलप्रवाह अथवा बाढ़ में फंसे व्यक्तियों को मोटर बोट्स, लाइफ जैकेट और रेस्क्यू रोप्स के माध्यम से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का त्वरित अभ्यास किया गया।
- त्वरित प्राथमिक चिकित्सा एवं मेडिकल इवेक्यूएशन: रेस्क्यू कर बाहर निकाले गए पीड़ितों को तत्काल एंबुलेंस के जरिए आपातकालीन स्वास्थ्य टीम तक पहुँचाने और मौके पर ही जीवन रक्षक प्राथमिक उपचार (CPR, ब्लीडिंग कंट्रोल) देने की चरणबद्ध प्रक्रिया समझाई गई।
- बहुआयामी सुरक्षा तकनीकें: बाढ़ एवं जलभराव से बचाव के साथ-साथ अग्निकांड से सुरक्षा, विद्युत हादसों से बचाव और आपात स्थिति में बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित निकालने के महत्वपूर्ण सूत्र भी बताए गए।
मानवीय संवेदना, सेवा-भाव और जीवन रक्षा की व्यावहारिक पाठशाला
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाएं ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियां हैं, जिनका मुकाबला केवल व्यक्तिगत साहस से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और आपसी तालमेल से ही संभव है।
’न्यू लाईफ’ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों के लिए यह आयोजन केवल एक औपचारिक प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर मानवीय संवेदना, निःस्वार्थ सेवा-भावना और किसी भी संकट के क्षणों में दूसरों का जीवन बचाने के संकल्प की एक मजबूत व्यावहारिक पाठशाला साबित हुआ।
इस अवसर पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, आपदा प्रबंधन बल के विशेषज्ञ जवान, ‘न्यू लाईफ’ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग का प्रबंधन, समस्त प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।






