छठव्रतियों से अपील कोरोना सक्रमण के खतरे को देखते हुए अपने घरों में ही छठ महापर्व करें और भगवान भास्कर को करें अर्घ्य अर्पित

प्राचीन काल में छठ पर्व से एक महीना पहले ही लोग नदी के किनारे घाटों पर कल्पवास करते थे, और यहीं कार्तिक मास की साधना करते हुए छठ महापर्व मनाते थे. नदी घाटों पर ही गेहूं को धोकर सुखाकर प्रसाद तैयार किया जाता था. लेकिन आज के दौर में स्थिति बदल गई है. लोग अब छठ घाट पर अर्घ्य देने जाते है. लेकिन अब भी कुछ छठव्रती छठ घाटों पर रात भर रुक कर जागरण करते हैं. ऐसा करने के पीछे मन्नत पूरा होना एक कारण होता है।
छठ की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरा सरकारी महकमा इसकी तैयारियों पर नजर बनाए रखता है. सूबे के मुखिया नीतीश कुमार खुद घाटों का जायजा लेने हर साल पहुंचते हैं. इस बार भी सीएम ने पटना के गांधी घाट से कंगन घाट, भद्र घाट, कृष्णा घाट के साथ तमाम घाटों का निरीक्षण किया. इस बार कई ऐसे घाट होंगे जहां छठ महापर्व नहीं किया जा सकेगा. इसका कारण गंगा का बढ़ता जलस्तर है. बढ़ते हुए जलस्तर और गाद जमा होने के कारण कई घाटों को खतरनाक घोषित किया गया है।
छठव्रतियों को कोई परेशानी न हो इसका खास ख्याल रखा जाता है. हालांकि कोरोना सक्रमण के खतरे को देखते हुए लोगों से अपील भी की गई है कि वो अपने अपने घरों में ही छठ महापर्व करें और भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करें. छठ के लिए कई अस्थाई तालाब भी बनाए जाते हैं. मोहल्ले के पार्कों में, कॉलोनियों में अस्थायी घाट बनाया जाता है ताकि घाटों में लोगों की भीड़ न हो. इस बार भी खास व्यवस्थाएं हैं. नहाए खाए के दिन टैंकर के जरिए गंगा जल का वितरण कर छठ व्रतियों के इस महापर्व को आसान बनाने की कोशिश है.

बताया जाता है की छठ महापर्व में स्वच्छता और पवित्रता का पूरा ख्याल रखा जाता है. जिस घाट पर छठव्रती संध्याकाल को अर्घ्य देंगे. उसी स्थान से अगली सुबह उदयीमान भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा. प्रशासनिक अमला मुस्तैदी के साथ इसके लिए डटा हुआ है. हर साल से इस साल ज्यादा तैयारी भी करनी पड़ रही है. इसका कारण गंगा का बढ़ता जलस्तर है. जो घाट खतरनाक हैं वहां लाल कपड़ा लगाया गया है और बैरिकेडिंग कर दी गई है. छठ घाटों पर दो दिनों तक विहंगम नजारा देखने को मिलता है. छठ महापर्व को लेकर सूबे का माहौल भक्तिमय बना हुआ है




