वर्ष 2021-22 की बोर्ड परीक्षा में कोरोना की तीसरी लहर के वजह से बच्चों की भविष्य अधर में, गरीब व् मध्यम वर्गीय पालकों को मोबाईल फोन हेतु आर्थिक व् बच्चों को पढ़ाई करने मानसिक तनाव…
संतोष देवांगन- कोरोना के इस तीसरी लहर में दुर्ग जिला के पाटन में शिक्षक शर्दी खांसी के इस ख़राब मौसम के चलते बच्चों को सिविल ड्रेस में स्कूल बुला रहे है जो बच्चे शर्दी खांसी से संक्रमित है एक ओर मोबाईल कंपनी अपनी पलान में वृध्दि कर दी है जिसे रिचार्ज करने में पालकों के पसीने छूट रहे है. व पालक द्वारा अपने दो – तीन बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई करने हेतु मोबाईल फोन व्यवस्थित नहीं कर पाने की वजह से छात्र एक दूसरे के घर जाकर ऑनलाइन क्लास को अटेंड करने मशक्क्त कर रहे है जिससे की संक्रमण फ़ैलने दर बना है. साथ ही पालकों को आर्थिक व् बच्चों को पढ़ाई करने मानसिक रूप से तनाव उत्त्पन्न हो रहा है. जिससे की इस वर्ष 2021-22 की बोर्ड परीक्षा में कोरोना की तीसरी लहर के वजह से बच्चों की भविष्य अधर में है।
राज्य सरकार ‘BPL परिवार’ के सभी क्लास के छात्र-छात्राओं को बांटे अच्छी क्वालिटी के ‘एंड्राइड मोबाईल और डेटा’
कोरोना वायरस से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा आर्थिक रूप से प्रभावित हुआ है एक ओर रोजी-रोटी की चिंता तो दूसरी ओर अपनी बच्चों को वायरस के चलते ऑनलाइन पढ़ाई कराने ‘एंड्राइड मोबाईल और डेटा’ की चिंता सताए जा रही है। जिन पालकों के दो-तीन बच्चे है उनको तो सबसे ज्यादा आर्थिक तनाव से गुजरना पढ़ रहा है. इतना ही नहीं इन परिवार के बच्चों की भी मानसिकता पढ़ाई और उसके मोबाइल खर्चे से प्रभावित हो रही है। इसलिए राज्य में सभी ‘BPL-मध्यम वर्गीय परिवार’ बच्चों को 8वीं से 12वीं व कॉलेज के I ,II, III ईयर छात्र छात्राओं को अच्छी क्वालिटी के ‘एंड्राइड मोबाईल और डेटा’ निशुल्क वितरण करें. जिससे की मोबाइल के नाम पर पालकों और विद्यार्थियों को आर्थिक बोझ व तनाव से मुक्ति मिले और कोरोना वायरस के चलते उनकी ऑनलाइन पढ़ाई भी अच्छी तरह चलती रहे।
बतादे की भानुप्रतापपुर में सेलेगांव के सरकारी हाई स्कूल में कोरोना ब्लास्ट हुआ है। यहां एक शिक्षक समेत 10 बच्चे कोरोना संक्रमित निकले हैं। स्कूल को 3 दिनों के लिए बंद किया गया है।
हालांकि शिक्षक भी इस शर्दी खांसी से संक्रमित है और वे अपनी समय का उपयोग कर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने की कोशिश जारी है. वही पालकों का कहना है की इस वर्ष भी कोरोना की तीसरी लहर के वजह से बच्चों की पढ़ाई मानसिक रूप से पूरी नहीं हुई है हालांकि शिक्षक अपनी तरफ से इसे पूरी बता रही है लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों की पढ़ाई शून्य है. कई बच्चे आर्थिक तनाव के चलते काम-काज पकड़ लिए है।
बतादे की जिन बच्चों के पालक बिजनेशमैन व् शासकीय कर्मचारी है वे अपनी बच्चों को मोबाईल सुविधा उपलब्ध करा दिए है लेकिन जिन बच्चों के पालक , किसान , मजदुर, दिहाड़ी मजदुर है उनके लिए 8 – 10हजार की कोरोना कॉल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीदना आर्थिक बोझ बन गया है जिनके वजह से उनके सभी बच्चों की पढ़ाई अभी भी अधूरी है। यदि राज्य सरकार इस बार भी सभी क्लास के विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन दे तो ज्यादा बेहत्तर होगा और परीक्षा के नाम पर शिक्षा विभाग पर फिजूल खर्च से भी सरकार बच सकती है।
आपको बता दें स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक प्रदेश में कल 2693 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों की पहचान की गई थी. और 4871 मरीज़ स्वस्थ होने के उपरांत डिस्चार्ज/रिकवर्ड हुए। वही 19 कोरोना मरीजों की इलाज के दौरान मौत हुई है।






