धरोहरों को बचाने का संकल्प, जब मैनुअल सफाई करने में दिक्कत आई तो सेमी रोबोटिक मशीन को उतारा इंदिरा मार्केट के कुँआ को साफ करने
– अब बिल्कुल साफ, इस तरह से अन्य कुँओं और तालाबों को साफ करने और रिचार्ज करने की बन रही योजना
दुर्ग 12 मई 2022/ इंदिरा मार्केट स्थित कुँए में बरसों से कचरा डंप करने की वजह से पूरा कुँआ मृतप्राय हो गया था और वाटर रिचार्जिंग की संभावना समाप्तप्राय थी। जब निगम की टीम यहां कुँआ साफ करने पहुंची तो गैस की आशंका महसूस हुई। ऐसा लगा कि मैनुअल सफाई हुई तो जहरीली गैसों की वजह से किसी की जान जा सकती है।
ऐसे में कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के निर्देश पर सेमी रोबोटिक मशीन से इसे साफ कराने के निर्देश दिये गये। इसके बाद रायपुर से इस काम के विशेषज्ञों को बुलवाया गया। उन्होंने देखा कि कुँए में काफी गैस है इसलिए कुँए में सेमी रोबोटिक मशीन से साफसफाई करानी होगी।
साफसफाई हुई और अब यह कुँआ बिल्कुल स्वच्छ और रिचार्ज के लिए तैयार है। इसके पानी की क्वालिटी भी चेक की गई और यह बहुत अच्छी है। पानी का पीएच भी संतुलित है। इस संबंध में जानकारी देते हुए नगर निगम कमिश्नर श्री हरेश मंडावी ने बताया कि शहर के भीतर के कुँओं को पुनर्जीवित करने के लिए हम लोग काम कर रहे हैं।
इस क्रम में इंदिरा मार्केट का कुँआ पहला है। अभी 15 कुँओं का चिन्हांकन किया गया है तथा 30 तालाबों का चिन्हांकन भी किया गया है जिसमें साफसफाई की जाएगी ताकि बेहतरीन वाटर रिचार्ज किया जा सके। विधायक श्री अरुण वोरा ने कहा कि वाटर रिचार्ज के कार्यों से नगर में भूमिगत जल का स्तर बढ़ेगा और जल को सहेजने में बड़ी मदद मिलेगी। महापौर श्री धीरज बाकलीवाल ने कहा कि हम अपने जलस्रोतों का जितना संरक्षण करेंगे, उतना ही भविष्य के संकटों से निपट पाएंगे।
कुँओं के माध्यम से जल सहेजने का इतिहास प्राचीन, रायपुर के रींवा में भी मिले रिंग वेल-
भारत में पहले शहर नदियों के किनारे बसते थे ताकि जलस्रोतों की किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। ईसा की तीसरी सदी पूर्व जब मौर्य काल में बड़े पैमाने पर नगरों का विकास हुआ तो कुँओं की अधिक जरूरत महसूस हुई। इससे भारत में रिंग वेल कुँओं का विकास हुआ। अभी आरंग में रींवा में जो खुदाई चल रही है उसमें रिंग वेल प्राप्त हुए हैं। इस तरह छत्तीसगढ़ में भी उसी परंपरा को अपनाया गया।





