उपेक्षा और अपमान से क्षुब्ध शाहिद अशरफी ने छोड़ी भाजपा, सोशल मीडिया पर छलका दर्द

कोरिया। भारतीय जनता पार्टी में लंबे समय से सक्रिय और अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले समाजसेवी शाहिद अशरफी ने आखिरकार पार्टी को अलविदा कह दिया है। विगत कई वर्षों से संगठन के प्रति समर्पित रहने के बावजूद, उचित पद और सम्मान न मिलने को उन्होंने अपने इस्तीफे का मुख्य कारण बताया है।
निष्ठा पर भारी पड़ी उपेक्षा
शाहिद अशरफी जिले के उन कार्यकर्ताओं में गिने जाते रहे हैं जो संगठन के हर छोटे-बड़े कार्यक्रमों में पूरी ऊर्जा के साथ सक्रिय रहते थे। वे जिला अस्पताल में विधायक प्रतिनिधि के रूप में भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। एक सक्रिय समाजसेवी होने के नाते जनता के बीच भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती रही है। हालांकि, उनका आरोप है कि इतनी सक्रियता और ‘संगठन प्रथम’ की नीति पर चलने के बाद भी उन्हें पार्टी में वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
मुख्यमंत्री के दौरे ने बढ़ाई कड़वाहट
हाल ही में मुख्यमंत्री के कोरिया आगमन के दौरान हुई एक घटना ने इस विवाद में ‘आग में घी’ का काम किया। सूत्रों और अशरफी के सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार:
- मुख्यमंत्री के स्वागत हेतु तैयार की गई सूची में अल्पसंख्यक प्रतिनिधि के तौर पर अशरफी का नाम शामिल था।
- अंतिम समय में बिना किसी स्पष्ट कारण के उनका नाम सूची से काट दिया गया।
- इस सार्वजनिक उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा की थी, लेकिन संगठन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।
सोशल मीडिया पर किया इस्तीफे का ऐलान
लगातार दरकिनार किए जाने से क्षुब्ध होकर अशरफी ने अंततः भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि जहाँ पद और सम्मान दोनों न मिले, वहाँ काम करना अब संभव नहीं है।
”संगठन के लिए दिन-रात मेहनत करने के बाद भी जब केवल उपेक्षा ही हाथ लगे, तो स्वाभिमान की रक्षा के लिए कठोर निर्णय लेना पड़ता है।” — शाहिद अशरफी (सोशल मीडिया पोस्ट से साभार)
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
चुनावों और संगठन विस्तार के इस दौर में एक सक्रिय अल्पसंख्यक कार्यकर्ता का पार्टी छोड़ना स्थानीय भाजपा इकाई के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विपक्षी दल इसे भाजपा की ‘अंतर्कलह’ और ‘कार्यकर्ताओं की अनदेखी’ के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों ने अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।




