प्रशासनिक अनुशासन की उड़ी धज्जियां: रिटायरमेंट के 45 दिन बाद भी ‘कुर्सी’ से चिपके हैं यादव बाब

खड़गवां/मनेंद्रगढ़ (MCB): छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। खड़गवां ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक चर्चा का विषय बने इस मामले में एक सेवानिवृत्त कर्मचारी द्वारा नियम-कायदों को ताक पर रखकर कार्यालय पर कब्जा जमाए रखने का आरोप लगा है।
मामला क्या है?
महिला एवं बाल विकास विभाग में पदस्थ यादव बाबू (लिपिक) आधिकारिक रूप से 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त (Retire) हो चुके हैं। नियमानुसार, रिटायरमेंट के तुरंत बाद पद और प्रभार सौंप देना चाहिए, लेकिन आज 16 मार्च तक, यानी रिटायरमेंट के 45 दिन बीत जाने के बाद भी वे अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
नोटिस की अनदेखी और अवैध दखल
स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट के अनुसार, जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) द्वारा यादव बाबू को विभाग छोड़ने के लिए लिखित नोटिस भी जारी किया जा चुका है। बावजूद इसके, वे प्रतिदिन कार्यालय पहुंच रहे हैं और सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
नोटिस की अवहेलना: विभाग के उच्च अधिकारियों के आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
गोपनीयता पर खतरा: एक सेवानिवृत्त व्यक्ति का सरकारी फाइलों और विभागीय दस्तावेजों को देखना कानूनी रूप से अवैध है और विभाग की गोपनीयता पर सवाल खड़े करता है।
प्रशासनिक लाचारी: सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्रशासन एक पूर्व कर्मचारी को हटाने में इतना असमर्थ क्यों नजर आ रहा है?
किसका है संरक्षण?
खड़गवां क्षेत्र में यह सवाल जोरों पर है कि आखिर यादव बाबू को किसका संरक्षण प्राप्त है? किसके शह पर वे खुलेआम प्रशासनिक अनुशासन की धज्जियां उड़ा रहे हैं? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब जिला नया है और प्रशासन को सुदृढ़ होना चाहिए, तब ऐसी अराजकता देखने को मिल रही है।
जिला प्रशासन से मांग
आम जनता और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर महोदय से मांग की है कि:
इस अवैध हस्तक्षेप पर तत्काल रोक लगाई जाए।
दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हो जिन्होंने इतने दिनों तक इस अवैध कब्जे को मौन सहमति दी।
संपादकीय टिप्पणी: सरकारी कार्यालय किसी की निजी जागीर नहीं होते। रिटायरमेंट के बाद भी पद पर बने रहना न केवल अनैतिक है बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी जन्म देता है। प्रशासन को इस पर अविलंब कड़ा रुख अपनाना चाहिए।




