*दीया, फूल और झाड़ू से सीखें जीवन का संदेश : नोबेल साहू*

*➡️ दीपावली पर जिला साहू संघ अध्यक्ष ने समाजजनों को दी शुभकामनाएं*

*राजनांदगांव, 7 नवंबर।*

जिला साहू संघ के अध्यक्ष नोबेल साहू ने दीपावली के पावन पर्व पर गांव, शहर और प्रदेशभर के साहू समाज के सभी स्वजातीय बंधुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है बल्कि यह हमें जीवन जीने की अनेक महत्वपूर्ण सीख भी देती है। इस पर्व में उपयोग होने वाली छोटी-छोटी वस्तुओं में भी जीवन का बड़ा संदेश छिपा हुआ है। जरूरत है तो बस उन संदेशों को समझकर अपने जीवन में आत्मसात करने की।
श्री साहू ने कहा कि दीपावली में घरों को रोशन करने वाला मिट्टी का छोटा-सा दीया हमें परोपकार और त्याग की सीख देता है। दीया स्वयं जलता है अपना अस्तित्व खपाता है लेकिन दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाता है। ठीक इसी तरह मनुष्य को भी अपने ज्ञान, अनुभव, सामर्थ्य और अच्छे विचारों से दूसरों के जीवन में उजाला फैलाने का प्रयास करना चाहिए। जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं बल्कि दूसरों के काम आने में है। उन्होंने कहा कि दीपावली पर घरों की सफाई में उपयोग होने वाली झाड़ू भी हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। झाड़ू स्वयं घिसती रहती है, लेकिन घर, कार्यालय और आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाती है। इससे हमें सीख मिलती है कि हमें भी अपने जीवन में अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और बुराइयों को दूर कर समाज में स्वच्छ विचारों और सकारात्मकता का वातावरण बनाना चाहिए। दूसरों की कमियों को तलाशने के बजाय अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। इसी प्रकार दीपावली पर घरों और मंदिरों की सजावट में इस्तेमाल होने वाला फूल भी हमें जीवन का अनमोल संदेश देता है। फूल सुबह खिलता है और शाम होते-होते मुरझा जाता है लेकिन अपने पूरे जीवनकाल में अपनी सुंदरता और सुगंध से वातावरण को महका देता है। वह यह नहीं सोचता कि उसका जीवन कितना लंबा है, बल्कि जितनी देर रहता है, सबको खुशियां और सुगंध देता है। मनुष्य को भी अपने जीवन में प्रेम, सद्भावना, विनम्रता और सहयोग की खुशबू बिखेरनी चाहिए। श्री साहू ने कहा कि दीपावली का वास्तविक उद्देश्य केवल घरों को दीपों से सजाना नहीं, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों को भी सकारात्मक बनाना है। समाज में जरूरतमंदों की सहायता करना, आपसी भाईचारा बनाए रखना, बुजुर्गों का सम्मान करना और नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देना ही त्योहारों की सच्ची सार्थकता है। उन्होंने कहा कि यदि हम दीपक की तरह दूसरों को रोशनी देना, झाड़ू की तरह स्वच्छता और विनम्रता अपनाना तथा फूल की तरह अपने व्यवहार से खुशियां और सुगंध फैलाना सीख लें, तो हमारा परिवार, समाज और पूरा देश खुशहाल बन सकता है। श्री साहू ने सभी समाजजनों एवं प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

राजनांदगांव से दीपक साहू की रिपोर्ट

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