सामाजिक वानिकी के 20 हजार वृक्ष धराशायी, रेत चोरी का खौफनाक मंजर

महानदी तट पर हरियाली उजाड़ रहे अवैध उत्खननकर्ता, नौ साल में तैयार हुआ जंगल बर्बादी की कगार पर

गरियाबंद। एक ओर जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान से निपटने के लिये पौधरोपण पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गरियाबंद जिले के ग्राम पितईबंद में महानदी तट पर विकसित सामाजिक वानिकी उजड़ने की कगार पर है। वर्ष 2014-15 में नदी किनारे रोपे गये हजारों शीशम के वृक्ष अवैध रेत उत्खनन की भेंट चढ़ रहे हैं।

महानदी तट पर सामाजिक वानिकी

आरोप है कि रेत निकालने के लिये की जा रही खुदाई से पेड़ों की जड़ें उखड़ रही हैं और बड़े-बड़े वृक्ष धराशायी हो रहे हैं। जिस क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित करने के लिये वर्षों पहले पौधरोपण किया गया था, वहां अब रेत की अवैध खुदाई पर्यावरण के लिये गंभीर खतरा बनती जा रही है।

47 एकड़ में विकसित की गई थी सामाजिक वानिकी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजिम के निकट ग्राम पंचायत पितईबंद में महानदी के तट पर लगभग 47 एकड़ राजस्व भूमि में वर्ष 2014-15 के दौरान नदीतट सामाजिक वानिकी योजना के तहत शीशम के पौधे लगाये गये थे। इस क्षेत्र में लगभग 30 हजार पौधों के रोपण की जानकारी सामने आई है। वहीं, वन विभाग के निरीक्षण प्रतिवेदन में खसरा नंबर 356/1 एवं 176 के अंतर्गत लगभग 22 हजार वृक्षों के रोपण का उल्लेख है।

वर्षों की देखभाल के बाद ये पौधे वृक्षों का रूप ले चुके थे। लेकिन बीते दो-तीन वर्षों से क्षेत्र में कथित रूप से जारी अवैध रेत उत्खनन ने इस हरित क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय स्तर पर 20 हजार से अधिक वृक्षों के धराशायी होने की बात कही जा रही है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आधिकारिक आकलन सामने आना अभी बाकी है।

वन विभाग के निरीक्षण में भी सामने आई स्थिति

कार्यालय वन परिक्षेत्र अधिकारी, फिंगेश्वर के 4 नवंबर 2025 के निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार, सामाजिक वानिकी योजना की पांच वर्षीय अवधि पूरी होने के बाद रोपण क्षेत्र ग्राम पंचायत पितईबंद को हस्तांतरित कर दिया गया था। प्रतिवेदन में उल्लेख है कि संबंधित स्थल पर अवैध रेत उत्खनन के कारण रोपण क्षेत्र में लगे वृक्ष जड़ सहित उखड़कर गिर रहे हैं।

अवैध रेत उत्खनन का दुष्परिणाम

यह प्रतिवेदन इस बात की ओर संकेत करता है कि रेत उत्खनन का प्रभाव केवल नदी तट की भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों में विकसित किये गये वृक्षों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में वृक्षों की वास्तविक संख्या,नुकसान के क्षेत्रफल और जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिये विस्तृत जांच की आवश्यकता है।

पंचायत ने भी उठाया अवैध उत्खनन का मुद्दा

ग्राम पंचायत पितईबंद की ओर से कलेक्टर, गरियाबंद के खनिज शाखा को दिये गये आवेदन में महानदी तट पर अवैध रेत उत्खनन का मुद्दा उठाया गया है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि ट्रैक्टर चालकों एवं मालिकों द्वारा अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है, जिससे तटबंध के आसपास लगे पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है।

पंचायत के आवेदन के अनुसार, रात लगभग दो बजे से रेत उत्खनन शुरू होने की शिकायत है। आवेदन में करीब 100 पेड़ों को नुकसान पहुंचने का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही आशंका जताई गई है कि तटबंध की कटाई से गांव की बस्ती और खेतों में बाढ़ का पानी घुसने का खतरा बढ़ सकता है।

रास्ता बंद किया,फिर भी नहीं रुका उत्खनन

सरपंच प्रतिनिधि सहदेव बंजारे के अनुसार, महानदी तट पर रेत के अवैध उत्खनन को रोकने के लिए कई बार पहुंच मार्ग अवरुद्ध किया गया और कच्ची सड़क काटी गई, ताकि ट्रैक्टर एवं अन्य वाहन नदी तट तक नहीं पहुंच सकें। इसके बावजूद एक-दो दिन बाद सड़क को फिर से दुरुस्त कर लिया जाता है और उत्खनन का सिलसिला दोबारा शुरू हो जाता है।

सहदेव का कहना है कि खनिज विभाग को लगातार सूचना देने पर कभी-कभार कार्रवाई होती है, लेकिन इसका स्थायी असर दिखाई नहीं देता। उन्होंने मुक्तिधाम के निर्माणाधीन ढांचे के आसपास से भी बड़े पैमाने पर रेत निकाले जाने की बात कही है। उनके मुताबिक, अत्यधिक खुदाई के कारण इस ढांचे के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है।

विधायक बोले- नर्सरी का हस्तांतरण नहीं हो सकता

राजिम विधायक रोहित साहू ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने नदी तट पर अवैध रेत उत्खनन के कारण वृक्षों के गिरने की जानकारी होने की बात कही। विधायक के अनुसार, इस नर्सरी का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता और पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिये। उन्होंने बताया कि अवैध रेत उत्खनन और वृक्षों की कटाई रोकने के लिए राजस्व अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं।

अब रेत खदान की नीलामी की तैयारी

इस पूरे मामले के बीच खनिज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पितईबंद में रेत खदान के उत्खनन पट्टे के आंबटन के लिये निविदा आमंत्रित की जा रही है और इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के प्रपत्र जारी किए गये हैं। राजिम तहसील के ग्राम पितईबंद में खसरा नंबर 01 के अंतर्गत 4.90 हेक्टेयर क्षेत्र में रेत उत्खनन प्रस्तावित बताया गया है।

"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" के लिए किरीट ठक्कर की रिपोर्ट
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किरीट ठक्कर "छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" संवाददाता
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