जर्जर सड़क बनी मुसीबत: बारिश में गड्ढों ने बढ़ाई परेशानी, अफसर बेखबर

जर्जर सड़क बनी मुसीबत: बारिश में गड्ढों ने बढ़ाई परेशानी, अफसर बेखबर

 मनेंद्रगढ़ (एमसीबी जिला)

​एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले के मनेंद्रगढ़ क्षेत्र अंतर्गत खोंगापानी की मुख्य सड़क इन दिनों प्रशासन के विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रही है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार यह मुख्य मार्ग बारिश आते ही पूरी तरह बदहाल हो चुका है। सड़क पर बने गहरे-गहरे गड्ढे जलभराव के कारण तालाब में तब्दील हो गए हैं, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों, दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। वर्षों से मरम्मत की राह देख रही यह सड़क अब रोजाना हादसों को न्योता दे रही है।

अधिकारियों के निवास के पास बदहाली, फिर भी अनदेखी

​सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस मार्ग की यह दुर्दशा है, वहां से महज 700 मीटर की दूरी पर कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और पुलिस अधीक्षक (SP) के सरकारी आवास स्थित हैं। जिले के शीर्ष अधिकारियों की नियमित आवाजाही के बावजूद इस जर्जर सड़क की स्थिति सुधारने की दिशा में अब तक कोई पहल नहीं की गई है।

​बारिश के बाद सड़क और गहरे गड्ढों के बीच का अंतर समाप्त हो गया है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर गिर रहे हैं, वहीं पैदल चलने वाले लोग कीचड़ और दूषित जलभराव से जूझने को मजबूर हैं।

दुकानों और घरों में घुस रहा गंदा पानी, आर्थिक नुकसान

​सड़क किनारे स्थित दुकानदारों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि हल्की बारिश में भी स्थिति भयावह हो जाती है। जैसे ही कोई भारी वाहन या तेज रफ्तार दोपहिया वाहन यहाँ से गुजरता है, गड्ढों में जमा गंदा पानी उछलकर सीधे दुकानों और घरों के भीतर चला जाता है।

  • आर्थिक चपत: गंदा पानी और कीचड़ अंदर घुसने से दुकानों में रखा सामान खराब हो रहा है।
  • सफाई का अतिरिक्त बोझ: दिन में कई बार दुकानदारों को गंदगी साफ करनी पड़ती है, जिससे उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।

​स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मासूमों पर भारी प्रशासनिक लापरवाही: यूनिफॉर्म खराब होने का डर और हादसे का साया

​सड़क की इस बदहाली का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। प्रतिदिन इसी मार्ग से होकर स्कूल जाने वाले बच्चों को हर कदम संभालकर रखना पड़ता है।

  • यूनिफॉर्म और किताबों की चिंता: बच्चों को हमेशा यह डर सताता रहता है कि पास से गुजरने वाली गाड़ियों के छींटों से कहीं उनकी ड्रेस और बैग खराब न हो जाएं।
  • अभिभावकों में खौफ: जलभराव के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाज़ा नहीं मिल पाता, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक बेहद चिंतित हैं।

बड़ा सवाल: किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा विभाग?

​स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का नए सिरे से निर्माण और समुचित जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में कोई गंभीर दुर्घटना घट सकती है।

जनता का सवाल:

“आखिर जिम्मेदार लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन कब नींद से जागेगा? क्या खोंगापानी के निवासियों को राहत देने के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?”

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