150 किमी पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे 50 गांवों के ग्रामीण, वन भूमि से बेदखली रोकने और पट्टे की मांग एकता परिषद के बैनर तले 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सुशासन पर उठाए सवाल

150 किमी पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे 50 गांवों के ग्रामीण, वन भूमि से बेदखली रोकने और पट्टे की मांग

एकता परिषद के बैनर तले 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सुशासन पर उठाए सवाल

मनेन्द्रगढ़/

एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले के भरतपुर विकासखंड से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां अपनी जायज मांगों को लेकर ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। मंगलवार को भरतपुर क्षेत्र के लगभग 50 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण 150 किलोमीटर की लंबी और कठिन पैदल यात्रा तय कर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे। एकता परिषद के बैनर तले पहुंचे इन ग्रामीणों ने कलेक्टर संतन देवी जांगड़े से मुलाकात कर अपनी 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा और वन भूमि से बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई।

वर्षों से काबिज, अब रोजी-रोटी का संकट

​कलेक्टर से मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि वे पीढ़ियों से वन भूमि पर निवास कर रहे हैं और खेती-किसानी के जरिए ही अपना और अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान में वन विभाग द्वारा उन्हें उस भूमि से हटाने और बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है। इससे उनके सामने न सिर्फ आशियाना छिनने का डर पैदा हो गया है, बल्कि रोजी-रोटी का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:

    • वन अधिकार पट्टा: वन अधिकार अधिनियम के तहत जितने भी पात्र हितग्राही हैं, उन्हें अविलंब वन अधिकार पट्टा प्रदान किया जाए।
    • बेदखली पर तत्काल रोक: जब तक वन भूमि से जुड़े दावों और आपत्तियों का पूरी तरह से निराकरण नहीं हो जाता, तब तक विभाग की किसी भी बेदखली या हटाने की कार्रवाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

“हम 150 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर मैडम से मिलने पहुंचे हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि वे हमारी जायज मांगों को पूरा करेंगी। हमारा पूरा परिवार बड़ी उम्मीदें लेकर यहां आया है।”

— आंदोलन में शामिल ग्रामीण

 

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने ग्रामीणों की समस्याओं को बेहद ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि किसी भी पात्र व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होगा। कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और नियमानुसार आवश्यक व त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सुशासन तिहार के दावों पर पूर्व विधायक का निशाना

​इस पूरे मामले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस स्थिति पर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। कमरो ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “एक तरफ सरकार ‘सुशासन तिहार’ मनाने का ढोंग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ गरीब ग्रामीणों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए 150 किलोमीटर दूर पैदल चलकर जिला मुख्यालय आना पड़ रहा है।”

​उन्होंने आरोप लगाया कि भरतपुर-सोनहत क्षेत्र में जनसमस्याओं के निपटारे की गति पूरी तरह ठप है। वन अधिकार जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को राजनीति छोड़कर गंभीरता से पहल करनी चाहिए ताकि आदिवासियों और ग्रामीणों को उनका हक मिल सके।

संपादकीय टिप्पणी (यदि स्पेस हो तो):

​कड़ाके की धूप और रास्तों की परवाह किए बिना 150 किलोमीटर का सफर तय कर कलेक्ट्रेट पहुंचना यह साबित करता है कि दूरस्थ अंचलों में आज भी प्रशासनिक अमले और जनता के बीच संवादहीनता की स्थिति बनी हुई है। यदि स्थानीय स्तर पर ही इन समस्याओं की सुनवाई हो जाती, तो ग्रामीणों को यह कठिन रास्ता अख्तियार नहीं करना पड़ता। अब देखना होगा कि कलेक्ट्रेट के निर्देशों के बाद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

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