Cg24News-R:- वर्तमान में अशान्त हिंसात्मक आतंक स्वार्थ भरे परिवेश में गांधी जी के सत्य अहिंसा प्रेम शान्ति एकता सद्भाव सादगी के विचार प्रासंगिक हैं। गांधी जी सिर्फ देश की स्वतंत्रता ही नहीं बल्कि भारत सहित सम्पूर्ण विश्व में स्वतंत्रता समानता बन्धुत्व सत्य अहिंसा सत्याग्रह एवं मानव मूल्यों पर आधारित एक ऐसे समाज की स्थापना की जिसमें किसी के साथ के साथ धर्म जाति नस्ल आदि का भेदभाव न हो। अहिंसा के रूप में उन्होंने महान और नैतिक पथ निर्मित किया। वे अहिंसा के आधार से मनुष्य का जीवन, सम्पूर्ण मानव समाज और जगत की व्यवस्था के लक्ष्य की कल्पना की। गांधी जी की अहिंसा वीरता दृढता तथा धैर्य पर आधारित है जो अत्याचार व अनाचार को जगत की सारी शस्त्र शक्ति और द्वेष तथा दम्भ से युक्त व्यवस्था की सारी दमनात्मक प्रवृति को चुनौती देती है। उनका गहरा दृष्टिकोण था कि पशुता पर देवत्व की विजय तब होगी जब नैतिक और शुभ की भावना से अनैतिक और दानव भाव की पराजय हो। उनकी अहिंसा नैतिकता पर आधारित है। गांधी जी अहिंसक क्रान्ति, हिंसाहीन संघर्ष, सत्य और अहिंसा का सहारा लेकर दमनकारी अन्ग्रेजी राज्य को चुनौती दिया। उनका यह व्यक्तितव वर्तमान के युवा वर्ग के लिए प्रेरणीय है। वह नैतिक साहस के
धनी थे।
दूषित विचार सबसे बड़ा हथियार होता है। हथियारों की अपेक्षा नफरत भेदभाव और घृणा जैसे विचार ज्यादा खतरनाक होते हैं।शारीरिक शक्ति व शस्त्र शक्ति कुछ सीमा तक व्यक्ति व समाज को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन दूषित विचार पूरे समाज को यहाँ कि कई पीढ़ियों तक नुकसान पहुंचा सकता है। नफरत का खून जिसकी रगों में दौड़ता है वह गांधी जी के विचारों को मिटा देने का असफल प्रयास करते हैं।वर्तमान समय में गांधी विरोधी समूह का तैयार होना देश में शांति व सद्भावना बनाए रखने के लिए बाधक है।
आजादी के इतने वर्ष बाद व विज्ञान एवं शिक्षा का स्तर बढ़ने के बाद भी देश के कुछ हिस्सों में उन्माद व भेदभाव जनित हिंसा देखने को मिलती है,यह राष्ट्रीय एकता में बाधक है व गांधी जी के विचारों के विपरीत है। देश में नफरत व घृणा नहीं बल्कि सहिष्णुता ल सद्भावना की वृद्धि होना चाहिए।वर्तमान में देश को समावेशी विकास की जरूरत है। मौजूदा परिवेश में कुछ लोग गांधी जी को प्रदत्त उपाधियों पर सवाल खड़े करते हैं। गौरतलब है कि गांधी को
राष्ट्रपिता की उपाधि आजादी के आन्दोलन के महानायक सुभाष चन्द्र बोस ने दी धी। इसी तरह महात्मा गाँधी को महात्मा की उपाधि स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता व प्रसिद्ध साहित्यकार रविन्द्र नाथ टैगोर ने दी धी। जो समाज व देशहित के लिए कुछ भी नहीं कर सकते ऐसे लोग महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व पर सवाल खड़े करते हैं।
गाँधी जी का यह कथन कि मेरे शरीर के दो टुकड़े कर दो भारत देश के दो टुकड़े नहीं होना चाहिए। उनका यह विचार राष्ट्रीय एकता व अखंडता को बनाए रखने के भाव को पुष्ट करता है। वर्तमान समय में बंटते समाज असमानता और मतभेदों के इस दौर में गांधी जी के विचार अनुकरणीय है। विभाजनकारी व कट्टरवादी सोच भारतीय एकता के लिए घातक है। अतः गाँधी जी के सद्भाव और समन्वयकारी विचारों को अपनाने की जरूरत है। वर्तमान समय में भेदभाव की वजह से कहीं-कहीं जाति गत हिंसा देखने को मिलती है। यह भी गांधी जी के विचारों के विपरीत है। सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र का लक्ष्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है। गांधी जी का दर्शन मानव जीवन व संसार के लिए नैतिक भाष्य है।वर्तमान समय में गांधीवाद का प्रदर्शन तो बहुत होता है पर उनके विचारों भूलाया जा रहा है। गांधी जी की आर्थिक नीति मे किसी को खाने और पहनने के लिए तरसना न पडे का भाव शामिल है। वे सम्पत्ति के असंतुलित आधार के विरूद्ध थे। गांधी जी की अहिंसा में व्यापकता व समग्रता का बोध समाहित है जिसके कारण विश्व के लिए प्रेरणीय है। इसीलिए संयुक्त राष्ट्र ने गांधी जी के के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके दर्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष 2 अक्टूबर को शांति व अहिंसा के वैश्विक प्रतीक महात्मा गाँधी की जयंती पर इस दिन को अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस का उद्देश्य शिक्षा व जन जागरूकता के माध्यम से अहिंसा शान्ति व सहिष्णुता का प्रचार-प्रसार करना है।
उन्होंने सत्य पर असत्य की विजय व अहिंसा जैसे नैतिक शक्ति से समाज व देश का प्रकाश पूर्ण नेतृत्व किया। यही वह स्वप्न है जिसे गान्धीजी ने देखा व जिसे साकार करने का दायित्व हम सभी देश वासियों पर है। मौजूदा परिवेश में सामाजिक व धार्मिक विभाजन बढ़े हैं। ऐसे में गांधी जी के प्रेम सदभावना एकता व समन्वयकारी आदि विचारों को अपनाने की जरूरत है। वर्तमान समय में गांधी जी के अहिंसा के सिद्धांत की सार्वभौमिक प्रासंगिकता है।इसे पुष्ट करने की जरूरत है। गांधी जी सत्य व अहिंसा का उपयोग भविष्य में राष्ट्र के पुनर्निर्माण में अपना भावी दृष्टिकोण रखने के लिए करते रहे। गांधी जी के विचारों व सपनों का विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नये विजन के साथ विभाजनकारी चुनौतियों से पार पाना होगा व कमियों को दूर करना होगा। इसी में हम सबकी भलाई है।