✍️जिला संवाददाता विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
देवभोग-आजादी के सात दशक बाद भी देवभोग ब्लॉक में बिजली की समस्या जस की तस बनी हुई है… आज भी यहां के 108 गॉव के लोगों को आये दिन ब्लैक आउट की समस्या से गुजरना पड़ता है… बरसात आते ही देवभोग के साथ ही मैनपुर ब्लॉक के कई गॉव के हजारों लोगों को ब्लैक आउट की समस्या के बीच रात काटना पड़ता है… ब्लॉक में यह समस्या लम्बे समय से बनी हुई है.. जानकारों की माने तो लम्बी लाइन होने के साथ ही जंगल से होकर गुजरने के कारण आये दिन 33 केव्ही लाइन में पेड़ या डंगाल गिर जाता है, जिसके चलते लाइन फाल्ट हो जाता है.. वहीं जानकारों का यह भी दावा है कि देवभोग, झाखरपारा और अमलीपदर में कर्मचारियों की कमी लम्बे समय से बनी हुई है.. वहीं कर्मचारियों की कमी के चलते भी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था का सुचारु रूप से संचालन नहीं हो पा रहा है… यहां बताना लाजमी होगा कि अमलीपदर वितरण केंद्र में 18 हजार स्टॉफ है, जबकि यहां सिर्फ आठ ही कर्मचारी है, इसी के साथ ही यहां के जेई को मैनपुर का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.. अकेले जेई को अमलीपदर से लेकर मैनपुर तक का कार्य देखना पड़ता है… इसी तरह देवभोग और झाखरपारा वितरण केंद्र में जेई ही नहीं है… यहां देवभोग एई विनोद तिवारी के जिम्मे दोनों वितरण केंद्र की जिम्मेदारी है.. वहीं देवभोग, अमलीपदर और झाखरपारा में आउट सोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों के भरोसे बिजली विभाग का काम कछुवा चाल से संचालित हो रहा है…
उच्च अधिकारी कर रहे सौतेलापन व्यवहार-: जिले में देवभोग ब्लॉक अंतिम छोर पर बसा है.. अंतिम छोर पर होने के कारण जिले के बिजली विभाग के अधिकारी यहां के लोगों के साथ सौतेलापन व्यवहार करने से भी पीछे नहीं हट रहे है.. इसी का नतीजा है कि लम्बे समय से मांग होने के बावजूद भी यहां स्टॉफ की कमी बनी हुई है.. यहां बताना लाजमी होगा कि बिजली की समस्या और स्टॉफ की कमी को पूरा करने के लिए क्षेत्र की जनता ने सत्याग्रह ग्रुप बनाकर आंदोलन करना शुरू कर दिया था.. उस दौरान विभाग के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों ने मांग पर जल्द ही उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया था .. इसके बाद जनता के आवेदन को ठंडे बस्ते में डालकर मामले में चुप्पी साधकर देवभोग की जनता को उसी स्थिति में छोड़ देना ही अधिकारियों ने उचित समझा…यहां बताना लाजमी होगा कि देवभोग और मैनपुर क्षेत्र के 140 से ज्यादा गॉव में शुक्रवार शाम से ब्लैक आउट की समस्या उत्पन्न हो गई है.. समाचार लिखे जाने तक विधुत व्यवस्था बहाल नहीं नहीं हो पाया था, जबकि विभागीय अधिकारियों ने जल्द ही विधुत व्यवस्था बहाल करने का दावा किया है…
आउट सोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों के भरोसे बहाल हो पाती है बिजली व्यवस्था-: यहां बताना लाजमी होगा कि देवभोग, झाखरपारा और अमलीपदर में स्टॉफ की कमी लम्बे समय से बनी हुई है.. ऐसे में इन तीनों वितरण केंद्रों पर बिजली व्यवस्था के संचालन की पूरी जिम्मेदारी आउट सोर्सिंग कर्मचारी और संविदा कर्मचारियों के ऊपर है… अमलीपदर में जहाँ 18 हजार उपभोक्ताओं के लिए मात्र 8 संविदा और आउट सोर्सिंग के कर्मचारी है.. तो वहीं देवभोग और झाखरपारा के लिए मात्र 14 कर्मचारी है.. इन्हीं के भरोसे ही किसी तरह क्षेत्र की बिजली व्यवस्था बहाल हो पाती है…
मामले में छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़ ने ज़ब विभाग के सीई संदीप वर्मा को मामले से अवगत करवाकर सवाल-जवाब किया तो उन्होंने भी माना कि देवभोग और मैनपुर में कर्मचारियों की कमी है.. श्री वर्मा ने कहा कि जहाँ भी कर्मचारियों की कमी है.. उस कमी को जल्द ही पूरा किया जायेगा..




