✍️जिला प्रमुख सैयद बरकत अली के साथ मैनपुर संवाददाता हेमचंद नागेश की रिपोर्ट
अमलीपदर : ओड़िसा के काशीबहाल में रास्ता रोक कर कथावाचक से किये गए अपमान के लिए माफ़ी मांगने आए ग्रामीण दोनों प्रदेश के पुलिस की मौजूदगी में पंडित के घर पहुंचा था प्रतिनिधि मंडल मानव जीवन में व्यवहार,एहसास और चरित्र के बड़े मायने हैं।जीवन में क्षमा को परम धर्म माना गया हैं। माफ़ी माँगना या क्षमा करना बेहद सादगी एवं नम्रता को प्रदर्शित करने वाले शब्द हैं।
मनुष्य को सभी प्रकार के जीवों में श्रेष्ठ माना गया हैं।मानव की श्रेष्ठता का कारण उनके अपने गुण तथा कर्म होते है जिसके चलते वह महान कहलाता हैं।सम्भवतः ईश्वर ने मानव को जब बनाया होगा तब एक चीज उसके साथ अवश्य बनाई वो है गलती।अक्सर कहा जाता है मानव गलतियों का पुतला है यानि हम मानव है इसलिए हमसे गलती त्रुटी हो सकती हैं मगर हममें अपनी गलती को परखने और समझने की बुद्धि और विवेक भी हैं।
कई बार अनजान में भी गलती हो जाती है तो कभी बेपरवाह बनकर गलती कर दी जाती हैं।मनुष्य अपनी गलती के बाद चिंतन करता है तो पाता है कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था मगर एक बार की गई गलती को सुधारा तो नहीं जा सकता मगर भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो इसकी सीख ली जा सकती हैं।एक श्रेष्ठ चरित्रवान इन्सान की यह पहचान होती है कि वह गलती का एहसास होते ही क्षमा मांग लेता है अथवा किसी दूसरे से भूलवंश गलती हो जाने पर उसे माफ़ कर देता हैं। दोस्ती का रिश्ता हो या स्वजनों से सम्बन्ध वही इन रिश्तों को अच्छे से निभा सकता है जिन्हें क्षमा मांगने में झिझक न हो और क्षमा करने में कंजूसी न हो।
एक मनुष्य होने के नाते हमें इस तथ्य को स्वीकार कर लेना चाहिए कि गलती एक मानव स्वभाव है जो किसी अपने या पराए से कभी भी हो सकती हैं।यहाँ तक कि हम स्वयं भी बार बार गलती कर सकते हैं।इसलिए किसी की गलती को दिल पर लेने की बजाय बड़ा दिल दिखाकर माफ़ कर देने में ही महानता हैं।ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ से उड़ीसा के ग्राम काशी बहाल का सामने आया था जंहा 28 जुलाई की रात कथावाचक पंडित युवराज पांडेय के साथ ओड़िसा के काशीबहाल के कुछ लोगो ने रास्ता रोककर बदसूलकी किया था।
गांव से एक प्रतिनिधि मंडल शनिवार की रात पांडेय के गृहग्राम अमलीपदर पहुंचा हुआ था।प्रतिनिधि मंडल में काशीबहाल के पार्षद परक्षित महानन्द व प्रवीण कुमार पण्डा समेत कूल 4 लोगो की प्रतिनिधि मण्डल की टीम पहुंची हुई थी।जिन्होंने उस रात हुई घटना के लिए खेद प्रकट करते हुए पंडित युवराज को श्रीफल भेंट कर उनके चरण स्पर्श कर माफी मांगी। प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि कालाहांडी में चोरी की वारदात बढ़ गई है,इलाके का माहौल खराब है,इसलिए अनजाने में यह घटना घटित हुआ है।प्रतिनिधि मंडल ने कथावाचक को गांव आने का भी न्यौता दिया है।
ग्रामीणों की इस पहल को कथावाचक ने सहजता से स्वीकार किया,पंडित यूवराज ने प्रतिनिधि मंडल के अलावा सीजी पुलिस का समाधान के लिए आभार ब्यक्त किया है।उन्होंने सारे घटना क्रम के पीछे ऊपर वाले कि इच्छा बताया,बताया कि हो सकता है उनकी ख्याति ओड़िसा में भी हो इसलिए यह घटना घटित हुआ है ,अब इस मामले के लिए मन मे किसी प्रकार का टीस नही होना बताया,अपने समस्त अनुयायी,भक्तों से भी पंडित युवराज ने शांति ब्यवस्था की अपील किया है।
प्रतिनिधी मडंल में धर्मगढ़ थाने के उपनिरक्षक अमल सरदार,पत्रकार इंगित पण्डा,अंशुमन पात्र शामिल थे।इस मौके पर देवभोग थाना प्रभारी बोधन लाल साहू,ए एस आई के एल महिलांग,आरक्षक राहुल तिवारी के अलावा अमलीपदर पुलिस भी मौजूद थे।माफीनामे के बाद पंडित युवराज ने समस्त अतिथितियों को श्रीफल देकर विदा किया वंही मौजुद समर्थकों की भीड़ ने इस पल को यादगार बनाने जम कर आतिशबाजी कर भगवान जगन्नाथ के जयकारे लगाते रहे।
घटना के बाद 7 जिले के समर्थकों ने 19 थाने में सौपा था ज्ञापन
कथावाचक अपने एक सहयोगी के साथ दुपहिया में पुरी के लिए निकले हुए थे तब यह घटना घटित हुआ था।लेकिन अब इस मामले में पुलिस ने आपसी सुलह करा लिया है।घटना के बाद कथावाचक के अनुयायी व भक्त छतीसगढ़ के दुर्ग,बालोद,जगदलपुर, राजनांदगांव, बलौदाबाजार समेत 7 जिले में 19 थानों में ज्ञापन सौप अपने आचार्य के खिलाफ दुर्बयव्हार करने वालो पर कार्यवाही की मांग किया था।मामले में प्रदेश के गृहमंत्री से लेकर पीएम तक के ज्ञापन भेजा गया था,कार्यवाही में विलंब होते देख ज्ञापनों की संख्या ने पुलिस की नींद उड़ा दिया था।हालांकि इस मामले को कथावाचक युवराज पांडेय तूल देना नही चाह रहे थे,बावजूद उनके अनुयायीयो व चाहने वालो का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था।
पुलिस ने सामांजस्य स्थापित कर निकाला हल
मामला लगातार तूल पकड़ रहा था,पुलिस कार्यवाही की तैयारी के अलावा समाधान का भी रास्ता ढूंढ रही थी। जिले के एसपी जे आर ठाकुर के निर्देश पर देवभोग थाना प्रभारी लगातार धर्मगढ़ पुलिस से जाकर मिलते रहे।कालाहांडी की ओर से धर्मगढ़ एसडीओपी धीरज चोपदार मोर्चा संभाले हुए थे।चोपदार ने अपने सूझ बूझ से गरियाबन्द पुलिस के साथ सामांजस्य स्थापित कर मामले का हल खोज निकाला।शांति कायम रखने लल्लूराम. कॉम के रिपोर्टर पुरुषोत्तम पात्र की भी भूमिका की सराहना पुलिस ने किया है।एसडीओपी धीरज चोपदार ने कहा कि जिनका अपमान किया गया था,उनका सम्मान वापस करना हम सबकी जिम्मेदारी थी।ऐसी घटना की पुनरावृति न हो उसके लिए विशेष हिदायतें दी जा रही है।हमारी पेट्रिलिंग पार्टी का दायरा भी बढ़ा दिया गया है।
व्यक्तित्व का अदभुत गुण है क्षमा:युवराज पाण्डे
इस पूरी घटना के सम्बंध में श्री पाण्डे से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि क्षमा का जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। अगर इंसान कोई गलती करे और उसके लिए माफी मांग ले तो सामने वाले का गुस्सा काफी हद तक दूर हो जाता है। जिस तरह क्षमा मांगना व्यक्तित्व का एक अच्छा गुण है, उसी तरह किसी को क्षमा कर देना भी इंसान के व्यक्तित्व में चार चांद लगाने का काम करता है।
माफ करने वाले व्यक्ति की हर कोई तारीफ करता है और उसकी प्रसिद्धि दूर दूर तक फैल जाती है। कवियों ने क्षमा को अपने अपने ढंग से परिभाषित किया है। ‘क्षमा बड़न को चाहिए छोटन को उत्पात कहा रहीम हरि को घटयो जो भगु मारी लात’ जैसी पंक्तियां यही संदेश देती हैं कि क्षमा करना बड़ों का दायित्व है। यदि छोटे गलती कर देते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें माफ न किया जाए।वहीं रामधारी सिंह दिनकर ने कहा है कि क्षमा वीरों को ही सुहाती है। उन्होंने लिखा है कि क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो, उसका क्या जो दंतहीन, विषहीन, विनीत सरल हो।वह लिखते हैं कि सहनशीलता, क्षमा दया को तभी पूजता जग है, बल का दर्प चमकता उसके पीछे जब जगमग है। क्षमा को सभी धमो और संप्रदायों में श्रेष्ठ गुण करार दिया गया है। जैन संप्रदाय में इसके लिए एक विशेष दिन का आयोजन किया जाता है।
मनोविज्ञानी भी क्षमा या माफी को मानव व्यवहार का एक अहम हिस्सा मानते हैं।श्री पाण्डे का कहना है कि यह इंसान की जिन्दगी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है। क्षमा का मनुष्य के व्यक्तित्व में बहुत महत्व होता है। यदि आदमी गलती कर दे और उसके लिए माफी नहीं मांगे तो इसका मतलब यह हुआ कि उसके व्यक्तित्व में अहम संबंधी विकार है।उनका कहना है कि यदि कोई आदमी माफी मांगने पर भी किसी को माफ न करे तो उसके व्यक्तित्व में भी अहम संबंधी विकार होता है।श्री पाण्डे ने कहा कि माफी मांगना और माफ करना दोनों ही इंसानी व्यक्तित्व को परिपूर्ण करने वाले तत्व हैं।




