कुम्हारी स्थित मां महामाया मंदिर में मनोकामना के 1806 ज्योति प्रज्वलित
कुम्हारी
कुम्हारी स्थित धरती फोड़ विराजमान हुई मां महामाया माता मंदिर में आस्था के लगभग 1806 ज्योति प्रज्वलित हुए है। जिनकी तैयारी मंदिर के पंडा व पुजारियों ने एक दिन पहले ही कर लिए थे। मंदिर में प्रति वर्ष चैत्र नवरात्र व क्वांर माह के नवरात्र में श्रद्धालुओं द्वारा जोत जलवाया जाता है। नगर में आस्था का केंद्र बनी मां महामाया माता का मंदिर बहुत प्राचीन है। देवी की महिमा प्रदेश ही नही बल्कि देश विदेश में फैली हुई है। यही कारण है कि हजारों की भीड़ में श्रद्धालुओं द्वाराहर नवरात्र में मां की प्रतिमा के दर्शन के लिए मंदिर पहुँचते है। इसी कड़ी में इस चैत्र नवरात्र आस्था के लगभग 1806 ज्योति कलश प्रज्वलित किये जा रहे है। नवरात्र के अवसर पर हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है उल्लेखनीय है कि महामाया माता की देख रेख देवांगन परिवार द्वारा पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है। मंदिर के पुजारी के अनुसार मां महामाया माता का इतिहास काफी पुराना है। बताया जाता है कि पहले यहां घनघोर जंगल था तब माता गांव के ही साधारण देवांगन परिवार में जन्में हिरासिंग के स्वप्न में आई थीं। स्वप्न में मां ने गांव के कुछ दूरी पर मिट्टी और झाड़ियों के बीच खुद को होना बताया वहाँ जाने पर धरती फोड़ विराजमान हुई माता की प्रतिमा दिखाई दी। तब पुजारियों ने यहां झाड़ियों की साफ-सफाई करके विधि-विधान पूजा-पाठ किया । बताया जाता है कि माता की प्रतिमा हर साल बढ़ रही है । उनके प्रति लोगों की आस्था भी बढ़ रही है। मां महामाया मंदिर के पुजारी बताते हैं कि महामाया माता को नगर के लोग अपनी कुलदेवी भी मानते है।



