न्यू लाईफ” में विश्व जनसंख्या दिवस पर कार्यशाला: बढ़ती आबादी के दुष्प्रभावों के प्रति छात्र-छात्राओं को किया जागरूक
युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना आज और भविष्य के लिए: थीम पर आधारित पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन से दी गई जानकारी

बैकुंठपुर/छत्तीसगढ़।
न्यू लाईफ हेल्थ एण्ड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित ‘न्यू लाईफ इंस्टिट्यूट आफ नर्सिंग’ में विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एक दिवसीय ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया. संस्था के संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल के कुशल निर्देशन एवं प्राचार्य डॉ. अंजना समुएल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में बढ़ती आबादी के कारण समाज और देश पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति भावी स्वास्थ्य कर्मियों (नर्सिंग छात्र-छात्राओं) को जागरूक करना था.
कार्यशाला के दौरान संस्थान के पांचवें सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि के गंभीर प्रभावों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया.

11 जुलाई: इतिहास और महत्व
कार्यक्रम में वक्ताओं ने विश्व जनसंख्या दिवस के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि:
- शुरुआत: वर्ष 1989 में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की गवर्निंग काउंसिल ने 11 जुलाई की तारीख को विश्व जनसंख्या दिवस के तौर पर मनाने का फैसला लिया था।
- पहला आयोजन: वैश्विक स्तर पर 11 जुलाई 1990 से यह दिन नियमित रूप से विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
- मुख्य उद्देश्य: बढ़ती आबादी के दुष्प्रभावों, स्वास्थ्य सुविधाओं पर बढ़ते बोझ और इससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर वैश्विक समाज का ध्यान आकर्षित करना है।
वर्ष 2026 की थीम: युवाओं पर केंद्रित

इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की विशेष थीम “युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना आज और भविष्य के लिए” निर्धारित की गई है। कार्यशाला में इस विषय को सरलता से समझाते हुए बताया गया कि यह थीम सीधे तौर पर युवाओं के स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, बेहतर कौशल (Skill Development) और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी पर जोर देती है।
बढ़ती जनसंख्या से प्रभावित हो रहे हैं बुनियादी अधिकार
ट्यूटर लक्ष्मी साहू और गीता चक्रधारी के संयोजन में संपन्न हुई इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को अवगत कराया गया कि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि का सीधा असर देश के संसाधनों पर पड़ता है। इसके कारण:
- गरीबी और कुपोषण में तेजी से वृद्धि होती है।
- जच्चे-बच्चे का स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।
- लैंगिक समानता, परिवार नियोजन के लक्ष्य को हासिल करने में बाधा आती है।
- वातावरण और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है तथा इंसानों के बुनियादी मानव अधिकारों का भी हनन होता है।
इस दौरान छात्र-छात्राओं को जनसंख्या नियंत्रण के विभिन्न उपायों और समाज में इसके महत्व के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के अन्य शिक्षक व भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
डॉ. प्रिंस जायसवाल (संचालक, न्यू लाईफ हेल्थ एण्ड एजुकेशन सोसायटी)
“विश्व जनसंख्या दिवस मात्र एक तारीख नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आत्ममंथन का दिन है। आज बढ़ती आबादी के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण पर अत्यधिक दबाव है। एक जिम्मेदार नर्सिंग संस्थान होने के नाते, हमारा यह कर्तव्य है कि हम अपने विद्यार्थियों को इस वैश्विक चुनौती के प्रति संवेदनशील बनाएं, क्योंकि कल को यही छात्र-छात्राएं समाज के बीच जाकर स्वास्थ्य दूत के रूप में काम करेंगे। वर्ष 2026 की थीम के अनुरूप, यदि हम अपने युवाओं को सही स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसर प्रदान कर सकें, तो बढ़ती जनसंख्या की चुनौती को एक सुदृढ़ और कुशल मानव संसाधन (Human Resource) में बदला जा सकता है। परिवार नियोजन और बेहतर स्वास्थ्य ही समृद्ध भविष्य की कुंजी है।”





