*जमीन हमारी, फैसला भी हमारा: श्री सीमेंट परियोजना के खिलाफ OBC महासंघ का मोर्चा
*कहा-किसानों की उपजाऊ जमीन और पर्यावरण की कीमत पर विकास स्वीकार्य नहीं” आगामी जनसुनवाई रद्द करने की मांग।
खैरागढ़ (प्रदीप बोरकर)। दनिया-अतरिया-हनईबन-उदयपुर क्षेत्र में प्रस्तावित श्री सीमेंट फैक्ट्री एवं चूना-पत्थर खनन परियोजना का विरोध लगातार तेज हो रहा है। गुरुवार को अन्य पिछड़ा वर्ग महासंघ, जिला KCG ने प्रेस वार्ता आयोजित कर परियोजना के संबंध में अपना रुख स्पष्ट किया। इसके बाद महासंघ के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर परियोजना से संबंधित आगामी प्रशासनिक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने तथा प्रस्तावित जनसुनवाई रद्द करने की मांग की।
महासंघ के पदाधिकारि टीलेश्वर साहू, अमर यादव, कपिनाथ महोबिया, सनत निषाद, नरोत्तम सिन्हा, डोमार वर्मा एवं हर्ष दशरिया ने कहा कि यह केवल फैक्ट्री स्थापित करने का मामला नहीं है बल्कि हजारों किसानों की जमीन, खेती, आजीविका, जलस्रोत, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और यहां की उपजाऊ भूमि ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
खेती, जल और पर्यावरण की कीमत पर कैसा विकास?
OBC महासंघ ने परियोजना के कारण संभावित धूल एवं वायु प्रदूषण, भूजल स्तर में बदलाव, जलस्रोतों पर प्रभाव तथा कृषि भूमि की उर्वरता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की। महासंघ का कहना है कि जिन खेतों में किसान पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, वे उनके लिए महज भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि पुश्तैनी विरासत और आजीविका का आधार हैं।
कृषि भूमि प्रभावित होने की स्थिति में ग्रामीण परिवारों के सामने रोजगार, आर्थिक असुरक्षा और पलायन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। महासंघ के सदस्यों ने कहा कि क्षेत्र में धान, चना, गेहूं, टमाटर सहित विभिन्न कृषि एवं वनोपज का उत्पादन होता है। यदि उद्योग स्थापित करना आवश्यक है तो क्षेत्र की कृषि और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप ऐसे उद्योग लगाए जाने चाहिए, जिनसे किसानों को रोजगार के अवसर मिलें और उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।
‘उद्योग का विरोध नहीं, किसानों के हित में विकास चाहिए’
महासंघ ने स्पष्ट किया कि वह उद्योग और विकास के विरोध में नहीं है। पदाधिकारियों ने कहा कि उद्योग अवश्य स्थापित होने चाहिए, लेकिन किसानों की उपजाऊ भूमि उजाड़कर और पर्यावरण की कीमत पर नहीं। बड़े उद्योगपतियों के आर्थिक लाभ के लिए किसानों की आजीविका प्रभावित करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिससे किसान, ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी सशक्त हो।
चार सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन
महासंघ ने प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें प्रस्तावित परियोजना की आगामी जनसुनवाई की प्रक्रिया पर रोक लगाना, किसानों की भूमि, खेती, जल, पर्यावरण एवं आजीविका पर संभावित प्रभावों को देखते हुए परियोजना को बंद या निरस्त करने की अनुशंसा करना, राज्य एवं केंद्र सरकार को परियोजना के संबंध में तथ्यात्मक प्रतिवेदन भेजना तथा किसानों के हितों को प्रभावित करने वाली आगामी प्रशासनिक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाना शामिल है।
पहले भी हो चुका है बड़ा आंदोलन
महासंघ ने कहा कि श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में क्षेत्र में पिछले वर्ष से ही आंदोलन जारी है। हाल ही में महिला एवं युवा संगठनों ने भी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर और प्रेस वार्ता के माध्यम से परियोजना का विरोध दर्ज कराया है। कुछ समय पूर्व छुईखदान क्षेत्र में हजारों किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर आंदोलन किया था। किसानों ने अपनी जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए सड़क पर उतरकर परियोजना के विरोध में आवाज बुलंद की थी।महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि आगामी जनसुनवाई की तैयारियों और परियोजना से संबंधित प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
महासंघ ने कहा कि किसान की जमीन उसकी पहचान है कृषि भूमि उसकी आजीविका है और जल-पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों का अधिकार है। जमीन हमारी है, तो फैसला भी हमारा होना चाहिए। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी व्यक्ति या उद्योगपति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसी परियोजना के खिलाफ है, जिससे किसानों की जमीन, खेती, जल, पर्यावरण और आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। महासंघ ने किसान अधिकार संघर्ष समिति के लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण एवं वैधानिक संघर्ष को अपना समर्थन दिया। इस दौरान श्रवण जंघेल, राजेंद्र शिवहरे, ऐमन जंघेल, वीरेंद्र जंघेल, विष्णु जंघेल, राकेश जंघेल, केजऊ जंघेल, शत्रुघ्न जंघेल, लकी जंघेल, भागवत, सुरेश, विष्णु, राकेश, केजऊ राम, बंसी राम, गणेश राम, पलस राम, जगेसर, मनोहर साहू सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे.





