राजनांदगांव । खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री वीरेंद्र चंद्राकर ने खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि विभाग की लापरवाही के चलते लाखों-करोड़ों लोगों, खासकर बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
श्री चंद्राकर ने आरोप लगाया कि शहर में खुलेआम पैकेट में पैक खाद्य सामग्री बेची जा रही है लेकिन इनकी गुणवत्ता की कोई ठोस जांच नहीं हो रही है। छोटे-बड़े सभी दुकानों में अनगिनत कंपनियों के खाद्य उत्पाद बिक रहे हैं परंतु यह जांचने वाला कोई नहीं कि ये खाने योग्य हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि बाजार में गीला-सूखा हर तरह का खाद्य पदार्थ बिना किसी निगरानी के बेचा जा रहा है जिसका सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। डॉक्टर भी लगातार पैकेट फूड से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं इसके बावजूद खाद्य विभाग की उदासीनता चिंताजनक है।
श्री चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि खाद्य विभाग सालभर कुंभकर्ण की नींद में सोया रहता है और केवल त्योहारों के समय अचानक सक्रिय होकर जांच अभियान चलाता है। उन्होंने इसे दिखावटी कार्रवाई बताते हुए कहा कि नियमित निगरानी का अभाव ही समस्या की जड़ है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि आजकल फल और सब्जियों में अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग हो रहा है। बिना जांच के ये उत्पाद सीधे लोगों की थाली तक पहुंच रहे हैं जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
श्री चंद्राकर ने सरकार से मांग की कि ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दिया जाए और किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे न केवल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि लोगों को हानिकारक केमिकल से भी राहत मिलेगी। उन्होंने मिलावटखोरों के खिलाफ कठोर से कठोर कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि जब तक कड़ी सजा का प्रावधान नहीं होगा तब तक इस तरह की गतिविधियों पर लगाम लगाना मुश्किल है।
राजनांदगांव में उठे ये सवाल केवल एक शहर तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह पूरे प्रदेश और देश के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो इसका खामियाजा आम जनता, विशेषकर बच्चों को भुगतना पड़ेगा।




