मुझमें दम है तो कसौटी पर कस लें…’ नेता प्रतिपक्ष महंत के बयान पर भड़के जगद्गुरु रामभद्राचार्य, दी खुली चुनौती
चिरमिरी की व्यासपीठ से गरजे रामभद्राचार्य: बोले— 22 भाषाओं का ज्ञान है, रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले हमें न सिखाएं; जोगी फिर भी अच्छे थे, इनमें तो कॉमनसेंस भी नहीं।

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी):
छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के चिरमिरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के अंतिम दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज का रौद्र रूप देखने को मिला। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा जगद्गुरु की प्रामाणिकता पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए पूज्य महाराज श्री ने व्यासपीठ से उन पर तीखा और सीधा पलटवार किया है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मंच से दहाड़ते हुए कहा, “नेता प्रतिपक्ष को मेरी खुली चुनौती है, वे आएं और मेरे जगद्गुरु होने का पूर्ण परीक्षण कर लें। मैं हर कसौटी पर खरा उतरने को तैयार हूँ।”
जगद्गुरु होने की परिभाषा और योग्यता बताई
महाराज श्री ने जगद्गुरु पद की महत्ता को स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी ऐरा-गैरा जगद्गुरु नहीं बन जाता। इसके लिए सनातन धर्म के तीन प्रमुख ग्रंथों (प्रस्थानत्रयी— उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और श्रीमद्भगवद्गीता) पर संस्कृत में भाष्य लिखना अनिवार्य होता है। उन्होंने कहा, “मैंने इन सभी पर भाष्य लिखा है और देश के सभी अखाड़े इसका पूर्ण समर्थन करते हैं। आज कुछ लोगों को मिर्ची लग रही है, क्योंकि जो राम जी से प्रेम करेगा, उसे मेरा आशीर्वाद मिलेगा।”
अतीत की याद दिलाकर कांग्रेस को घेरा
बिना नाम लिए कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए जगद्गुरु ने अतीत के पन्ने खोले। उन्होंने कहा, “वो दिन आप भूल गए जब अयोध्या में निहत्थे रामभक्तों पर लाठियां ही नहीं, बल्कि गोलियां तक चलवाई गई थीं? हम राम जन्मभूमि के आंदोलन के लिए महीनों जेल में रहे, आपने क्या किया? इसका उत्तर दीजिए।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि देश को गर्त में ले जाने, देश का विभाजन करवाने और देश को टुकड़ों-टुकड़ों में बंटवाने के जिम्मेदार यही लोग हैं।
अजीत जोगी की तारीफ, वर्तमान नेतृत्व पर कटाक्ष
सूबे की सियासत पर बात करते हुए रामभद्राचार्य जी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी की सराहना की। उन्होंने कहा, “अजीत जोगी फिर भी थोड़े अच्छे थे, लेकिन उसके बाद के लोगों की मैं क्या बताऊं? ये इतने असभ्य हैं कि इन्हें इतना कॉमनसेंस तक नहीं है कि संतों के बारे में बात कैसे की जाती है और उनके सामने कैसे बोला जाता है।”
22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोलने की चुनौती
अपनी विद्वता का लोहा मनवाते हुए उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को चुनौती दी कि वे उनकी योग्यताओं का मुकाबला नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे ही जगद्गुरु नहीं हूँ, मैं देश-विदेश की 22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोल सकता हूँ।”
कथा के नौवें और अंतिम दिन व्यासपीठ से दी गई इस कड़ी नसीहत और चुनौती के दौरान पूरा स्टेडियम ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा। उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ जगद्गुरु की वाणी का समर्थन किया।




