यदि नहीं, तो निगरानी तंत्र की विफलता क्यों? और यदि हाँ, तो कार्रवाई अब तक क्यों नहीं? अब तक नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस चुप्पी ने ही उसकी भूमिका पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
लोगों की माँग:
1. अवैध पेड़ कटाई की निष्पक्ष जांच हो।
2. दोषी बिल्डर पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. काटे गए पेड़ों के स्थान पर दोगुना वृक्षारोपण कराया जाए।
4. नगर निगम के लापरवाह अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो।
शहरों में बढ़ते प्रदूषण और घटते हरियाली के बीच पेड़ काटना एक अपराध से कम नहीं। ऐसे में यदि नगर निगम जैसी संस्थाएं भी चुप रहें, तो यह विकास नहीं, विनाश की ओर कदम है।
प्रशासन से अब जनता को जवाब चाहिए – क्या हरियाली के बदले सिर्फ कंक्रीट ही मिलेगा?




