शशिकांत सनसनी छत्तीसगढ़
बालोद _ छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गुरूर विकासखंड अंतर्गत पडकीभाट डोटोपार मार्ग पर खारून नदी में बन रहा डोंगाघाट एनिकट अब विकास नहीं, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर बन चुका है। अज्ञात सूत्रों से पता चला है कि 2 करोड़ 23 लाख रुपये की लागत वाला यह एनिकट स्थानीय लोगों के अनुसार गुणवत्ता, निगरानी और पारदर्शिता तीनों मोर्चों पर सवालों में घिरा है। काम की रफ्तार और सामग्री की हालत देखकर ग्रामीणों में गुस्सा है कि जनता के टैक्स का पैसा मिट्टी में मिलाया जा रहा है। आरोप है कि न तकनीकी मानकों का पालन हो रहा है, न ही जिम्मेदारों की मौजूदगी दिखती है। ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी का दावा खोखला साबित हो रहा है।सरपंच की चुप्पी खुद सवाल बन गई है।आरोपों के घेरे में ठेकेदार आशीष तिवारी जवाबदेही से क्यों भागते हैं।स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेकेदार आशीष तिवारी का नाम पहले भी विभिन्न कार्यों में अनियमितताओं से जुड़ता रहा है। डोंगाघाट परियोजना में भी घटिया सामग्री, जल्दबाज़ी और तकनीकी लापरवाही के आरोप सामने आ रहे हैं। सवाल उठता है क्या यह काम टिकाऊ है या पहली बाढ़ में बह जाने के लिए बनाया जा रहा हैआरोप यह भी हैं कि तिवारी से जुड़े कुछ मामले न्यायालयों में विचाराधीन रहे हैं।जिनका हवाला देकर लोग उनके ट्रैक रिकॉर्ड पर संदेह जता रहे हैं। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में ठेकेदारी पंजीयन और दस्तावेज़ों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीण पूछते हैं क्या नियमों को मोड़कर ठेके हासिल किए जा रहे हैं। क्या अलग अलग राज्यों में अलग-अलग विवरण देकर सिस्टम को गुमराह किया गया।सरपंच की चुप्पी लापरवाही या मिलीभगत ग्राम पंचायत का दायित्व था कि वह काम की गुणवत्ता, मापदंड और प्रगति पर नज़र रखे। मगर आरोप है कि सरपंच साइट पर नहीं पहुंचते, न ही सार्वजनिक समीक्षा होती है। यह चुप्पी संदेह पैदा करती है। क्या कमीशनखोरी की आशंका निराधार है या जांच से ही सच्चाई निकलेगीअब जनता बोलेगी जांच हो, दोषी बख्शे न जाएं यह सिर्फ एक एनिकट नहीं, बल्कि ग्रामीणों के हक़ पर हमला है। जल संरक्षण और सिंचाई के नाम पर अगर घटिया काम हुआ, तो नुकसान गांवों का होगा। जनता की मांग है। कि स्वतंत्र तकनीकी जांच हो।सोशल ऑडिट और सार्वजनिक रिपोर्ट RTI के जरिए दस्तावेज़ों का खुलासा ACB विभागीय जांच अब चुप रहने का वक्त नहीं। जनता का पैसा लूट की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। जवाबदेही तय हो, जांच निष्पक्ष हो और अगर आरोप सही हैं तो कठोर कार्रवाई हो।यही जनआक्रोश की आवाज़ है।




