विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट में भव्य आयोजन: नुक्कड़ नाटक व परिचर्चा से दिया मानसिक स्वास्थ्य का संदेश

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट में भव्य आयोजन: नुक्कड़ नाटक व परिचर्चा से दिया मानसिक स्वास्थ्य का संदेश

बैकुंठपुर। न्यू लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित अग्रणी शिक्षण संस्थान न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। संस्था के संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल के कुशल निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज परिसर के छात्र-छात्राओं ने कलात्मक, शैक्षणिक और व्यावहारिक माध्यमों से समाज को एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील संदेश दिया।

संस्था संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल का संदेश

​कार्यक्रम के अवसर पर संस्था संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल ने मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता और समाज की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

डॉ. प्रिंस जायसवाल 

“आज के दौर में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद आवश्यक हो गया है। कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि जीवन को ही समाप्त कर लिया जाए। अक्सर सही समय पर संवाद न हो पाने और सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण व्यक्ति निराशा के अंधकार में चला जाता है। हमारे संस्थान का उद्देश्य नर्सिंग शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करना है। हम समाज से यही अपील करते हैं कि अपने आसपास किसी भी व्यक्ति में तनाव या अवसाद के लक्षण देखें, तो उससे खुलकर बात करें और उसका संबल बनें। जीवन अनमोल है, और थोड़ी सी संवेदनशीलता से किसी की जान बचाई जा सकती है।”

 

थीम: “चेंजिंग द नैरेटिव ऑन सुसाइड” पर विशेष ध्यान

​कार्यक्रम की मुख्य विषयवस्तु विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा घोषित आधिकारिक थीम “चेंजिंग द नैरेटिव ऑन सुसाइड” (अर्थात ‘आत्महत्या पर सोच और बातचीत के नजरिए को बदलना’) पर आधारित थी।

​उल्लेखनीय है कि WHO ने इस वैश्विक अभियान को वर्ष 2024 से 2026 तक के लिए निर्धारित किया है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि इस थीम का मूल उद्देश्य समाज में व्याप्त उस चुप्पी को तोड़ना है, जो अक्सर मानसिक बीमारियों और तनाव के दौर से गुजर रहे लोगों के चारों ओर बन जाती है। यदि हम आत्महत्या और इसके कारणों पर खुलकर, बिना किसी पूर्वाग्रह के चर्चा करेंगे, तो ऐसे मामलों को समय रहते नियंत्रित करने और अनमोल जिंदगियों को बचाने में अभूतपूर्व मदद मिलेगी।

नाट्य प्रस्तुति के जरिए जीवंत किए संवेदनशील पहलू

​कार्यक्रम की सबसे मुख्य विशेषता कॉलेज के पांचवें सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार की गई नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति रही। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय कौशल के माध्यम से दर्शाया कि किस प्रकार आधुनिक जीवनशैली, शैक्षणिक दबाव, आर्थिक तंगी और पारिवारिक संवाद की कमी किसी व्यक्ति को एकाकीपन और अवसाद की ओर धकेल देती है।

नाटकीय प्रस्तुति के मुख्य बिंदु:

  • लक्षणों की पहचान: नाटक के जरिए दिखाया गया कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में आने वाले अचानक बदलाव, जैसे—अत्यधिक चुप रहना, खुद को अलग-थलग कर लेना, निराशाजनक बातें करना या दैनिक दिनचर्या से कट जाना—आत्महत्या की ओर बढ़ते कदम के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
  • समय पर हस्तक्षेप: छात्र-छात्राओं ने यह संदेश दिया कि यदि सही समय पर इन संकेतों को पहचान कर पीड़ित व्यक्ति से आत्मीय संवाद स्थापित किया जाए, तो उसे सही रास्ते पर वापस लाया जा सकता है।
  • सामाजिक सहयोग: प्रस्तुति ने इस बात पर जोर दिया कि परिवार और समाज की सकारात्मक ऊर्जा और बिना किसी जजमेंट (आकलन) के दी गई सहायता किसी भी व्यक्ति के जीवन को दोबारा पटरी पर ला सकती है।

उप-प्राचार्य ने दिए बचाव व रोकथाम के व्यावहारिक सुझाव

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान की उप-प्राचार्य निहा नैन्सी ने आत्महत्या के वैज्ञानिक, मानसिक और सामाजिक पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों और उपस्थित स्टाफ को इसके कारणों और रोकथाम के उपायों से अवगत कराया।

उप-प्राचार्य निहा नैन्सी का वक्तव्य:

“मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। समाज में आत्महत्या से जुड़ा जो ‘स्टीग्मा’ या कलंक की भावना है, उसे समाप्त करना बेहद जरूरी है। लोग अक्सर इस डर से मदद मांगने में हिचकिचाते हैं कि समाज उन्हें कमजोर या पागल समझेगा। हमें अपने घरों और शैक्षणिक संस्थानों में ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना होगा जहाँ कोई भी व्यक्ति बिना किसी झिझक के अपनी पीड़ा साझा कर सके और पेशेवर परामर्श (काउंसलिंग) ले सके।”

 

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ

​कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विद्यार्थियों को इस दिवस के इतिहास और वैश्विक महत्व की जानकारी भी प्रदान की गई।

  • शुरुआत: विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस को मनाने की शुरुआत वर्ष 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (IASP) द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से की गई थी।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में यह संदेश फैलाना है कि आत्महत्या कोई अंतिम समाधान नहीं है और इसे सामूहिक प्रयासों, सहानुभूति तथा सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन से पूरी तरह रोका जा सकता है।

कार्यक्रम का सफल संचालन व आभार

​इस पूरे जागरूकता अभियान का सफल प्रबंधन पांचवें सेमेस्टर के नर्सिंग विद्यार्थियों द्वारा किया गया। उन्होंने न केवल नाटक का लेखन और मंचन किया, बल्कि कॉलेज परिसर में सूचनात्मक पोस्टरों और चार्ट्स के माध्यम से भी मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रचार-प्रसार किया।

​कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्रबंधन, प्राध्यापकों और विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। संस्थान ने संकल्प लिया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम भविष्य में भी लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग तक मानसिक स्वास्थ्य और जीवन रक्षा का संदेश पहुँचाया जा सके।

ताज़ा खबरे

Video News

"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" के कंटेंट को कॉपी करना अपराध है। 

error: \"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़\" के कंटेंट को कॉपी करना अपराध है।