देहदान / नेत्रदान से बड़ा कोई पुण्य नहीं – राज्यपाल

मंच से महामहिम ने लिया देहदान का संकल्प, दधीचि देहदान समिति का सम्मान व संकल्प समारोह संपन्न

रिपोर्ट – अनमोल कुमार, पटना

पुण्यश्लोक सुशील कुमार मोदी की स्मृति में आयोजित तृतीय राष्ट्रीय अंगदान दिवस, एकादश अंतर्राष्ट्रीय अंगदान दिवस, सम्मान व संकल्प समारोह एवं पंचम राज्यस्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स सभागार में बिहार के महामहिम राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने किया।

राज्यपाल ने कहा—
> “देहदान और नेत्रदान से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मरणोपरांत इस शरीर को जलाने या दफनाने से बेहतर है कि इसे मानव कल्याण के लिए दान किया जाए।”

उन्होंने मंच से स्वयं भी देहदान का संकल्प लिया और आयोजन के लिए दधीचि देहदान समिति की सराहना की।

मुख्य अतिथि
बिहार स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के कुलपति एवं इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार ने अंगदान के महत्व पर कहा—

> “मृत्यु के बाद भी हमारे अंग सीमित समय तक उपयोगी रहते हैं – किडनी 26 घंटे, लिवर 15 घंटे, त्वचा 24 घंटे, फेफड़े 8 घंटे, आंख और कॉर्निया 6 घंटे तक। इनका दान न केवल जीवन बचाता है बल्कि मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी खोलता है।”

उन्होंने बताया कि शेष अंगों पर प्रशिक्षु चिकित्सक शल्य चिकित्सा व अनुसंधान कर कुशल डॉक्टर बनते हैं।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख हस्तियां

गंगा प्रसाद, पूर्व राज्यपाल (त्रिपुरा एवं मिजोरम) व अध्यक्ष, दधीचि देहदान समिति – अध्यक्षता
पद्मश्री डॉ. विमल जैन – महासचिव, दधीचि देहदान समिति
डॉ. संजीव चौरसिया – विधायक, दीघा
डॉ. सत्यजीत सिंह – चेयरमैन, रूबन मेमोरियल
डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा – उपनिदेशक, IGIMS
डॉ. नीलेश मण्डल – चेयरमैन, SOTO एवं सुपरींटेंडेंट, IGIMS
डॉ. सचिन कुमार – NMCH
डॉ. नागेश्वर शर्मा – PMCH
डॉ. अतुल मिश्रा – कटिहार मेडिकल कॉलेज
डॉ. आरिफ शहनबाज – दरभंगा मेडिकल कॉलेज
डॉ. अविनाश कुमार – lGIMS,डॉ. अमित कुमार – डॉ. पप्पी राव lGIMS – JMC, भागलपुर
सम्मान
समारोह में अंग प्रत्यारोपण में योगदान देने वाले चिकित्सकों और देहदानकर्ताओं को राज्यपाल ने सम्मानित किया।
मोकामा के वरिष्ठ पत्रकार अनमोल कुमार और अधिवक्ता भोला प्रसाद को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

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