
छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में आग का खेल भ्रष्टाचार के सबूत जलाने का तरीका नया
रायपुर – छत्तीसगढ़ में इन दिनों एक खतरनाक परंपरा बनती जा रही है। सरकारी दफ्तरों में आग लगना और फाइलों का राख में तब्दील हो जाना। संयोग कहें या साज़िश, लेकिन हैरानी की बात यह है कि हर आग ऑडिट से ठीक पहले और हर बार महत्वपूर्ण दस्तावेजों वाले कमरों में ही लगती है।
एक नहीं, कई विभाग—एक ही कहानी
बीते दिनों रायपुर का डीओ कार्यालय में आग, फाइलें जलीं, जांच ठंडे बस्ते में.. शनिवार की देर रात रायपुर आबकारी विभाग में करोड़ों से जुड़ी फाइलें खाक, बयान आया “शॉर्ट सर्किट”.. रविवार के रायगढ़ के मत्स्य विभाग में अब यहां भी आग, वर्षों के दस्तावेज समाप्त….. हर विभाग में कहानी बदली नहीं, सिर्फ विभाग का नाम बदला है।
वही बहाना, वही स्क्रिप्ट
हर बार मीडिया के सामने एक रटा-रटाया बयान आता है- “शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी।”सवाल यह है कि क्या पूरे प्रदेश में जनवरी–फरवरी में ही शॉर्ट सर्किट होता है?.. बाकी महीनों में बिजली क्या ईमानदार हो जाती है? अगर यह महज़ दुर्घटना है तो सिर्फ फाइलें ही क्यों जलती हैं? कंप्यूटर, फर्नीचर, दीवारें क्यों सुरक्षित बच जाती हैं? CCTV, फायर सेफ्टी सिस्टम हर बार क्यों ‘काम नहीं करते’?
आग नहीं, सबूत मिटाने की रणनीति!
अब यह कहना गलत नहीं होगा कि भ्रष्टाचार करो – ऑडिट से डरो – फाइलें जलाओ – सबूत मिटाओ।
सरकारी गलियारों में चर्चा है कि ऑडिट से पहले जानबूझकर दस्तावेज नष्ट किए जा रहे हैं, ताकि करोड़ों के घोटालों की परतें कभी खुल ही न सकें।
सूत्रों का बड़ा दावा
सूत्रों के मुताबिक यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं होगा। इस महीने कुछ और विभागों में भी आग लगने की ‘आशंका’ जताई जा रही है।
यानि आग अब हादसा नहीं, पूर्व-निर्धारित घटना बनती जा रही है।
जवाबदेही ज़ीरो, कार्रवाई गायब
अब तक किस अधिकारी पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ?
किस विभागाध्यक्ष को निलंबित किया गया?
कितनी FIR हुईं?
जवाब है— शून्य।
क्या छत्तीसगढ़ में आग लगना अब भ्रष्टाचार छुपाने का सरकारी हथियार बन गया है? क्या सबूत जलाकर सिस्टम खुद को बचा रहा है? अगर यही हाल रहा तो सरकारी दफ्तर फाइलों के नहीं, राख के संग्रहालय बन जाएंगे।




