*फर्जी सहमति पत्रों का आरोप — विष्णु लोधी ने इसे किसानों पर सीधा हमला बताया*
*किसानों की आवाज दबाना बंद करो – विष्णु लोधी ने प्रशासन को दी चेतावनी*
राजनांदगांव।
जिला खैरागढ ,छुईखदान ,गंडई क्षेत्र में किसानों की उपजाऊ भूमि पर प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्री को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 39 गांवों के किसानों ने ग्राम सभाओं में फैक्ट्री का खुलकर विरोध किया है तथा कई स्थानों पर फर्जी सहमति पत्रों के माध्यम से किसानों की इच्छा के विरुद्ध हस्ताक्षर करवाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
इस पूरे प्रकरण पर छत्तीसगढ़ लोधी समाज के प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता विष्णु लोधी ने कड़ा विरोध जताया है।
विष्णु लोधी ने कहा कि “खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिला कृषि प्रधान क्षेत्र है। किसान अपनी जमीन के मालिक हैं, लेकिन जमीन बिकते ही वे मजदूर बन जाएंगे। ऐसी परियोजना किसानों के भविष्य से खिलवाड़ है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
*“खेती आजीवन चलती है, फैक्ट्री अस्थायी रोजगार देती है”—विष्णु लोधी*
विष्णु लोधी ने कहा कि “सीमेंट फैक्ट्री में गिनती के लोगों को और वह भी सीमित समय के लिए रोजगार मिलेगा, जबकि खेती जीवन भर चलती है और पीढ़ियों को संवारती है। किसानों की जमीन छीनकर उन्हें बेरोजगारी की ओर ढकेलना सरासर अन्याय है।”
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे निर्णय क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक संरचना को तोड़ सकते हैं।
विष्णु लोधी ने कहा “जमीन किसान की पहचान है। जमीन चली गई तो किसान का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। इसे किसी भी कीमत पर होने नहीं दिया जाएगा।”
*विरोध के बीच 11 दिसंबर की जनसुनवाई पर सवाल*
विष्णु लोधी ने कहा ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब क्षेत्र के अधिकांश गांव विरोध में हैं, जब किसानों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप सामने आया है, और जब ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधि व सामाजिक संगठन विरोध दर्ज करा चुके हैं — तब प्रशासन द्वारा 11 दिसंबर को जनसुनवाई कराए जाने का क्या औचित्य है? “जनता जब विरोध में है, तब जनसुनवाई का कोई अर्थ नहीं है। यह किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास है।”
*विष्णु लोधी ने की जनसुनवाई तत्काल रद्द करने की मांग*
विष्णु लोधी ने कहा कि “हमारी पहली मांग है कि 11 दिसंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल रद्द किया जाए। किसानों से बिना सहमति किसी भी उद्योग का थोपना लोकतंत्र और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।”
उन्होंने फर्जी सहमति पत्रों की स्वतंत्र जांच की भी मांग की और कहा कि यदि किसानों की जमीन पर किसी भी प्रकार का दबाव बनाया गया तो इसका व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा।
*किसानों की एकजुटता और लोधी समाज का समर्थन*
विष्णु लोधी ने कहा कि “यह केवल जमीन की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान, अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। किसानों की आजीविका पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।”
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि
“किसान की जमीन नहीं बिकेगी, और सीमेंट फैक्ट्री किसी भी कीमत पर नहीं लगने देंगे।”
राजनांदगांव से दीपक साहू की रिपोर्ट 




