शशिकांत सनसनी सुकमा छत्तीसगढ़

सुकमा स्वास्थ्य विभाग में भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में: अनियमितता, पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
अभ्यर्थियों में आक्रोश, पारदर्शिता पर उठे सवाल
यह रिपोर्ट जसराज जैन ‘रक्तमित्र’ द्वारा प्रस्तुत की गई है।
स्वास्थ्य विभाग सुकमा द्वारा की जा रही सीधी भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता, पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। CMHO कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर अभ्यर्थियों में भारी असंतोष है। दस्तावेज़ों की अनदेखी, अपात्र उम्मीदवारों को पात्र घोषित करना, और योग्य अभ्यर्थियों को तकनीकी कारणों से बाहर करना जैसे मामलों ने पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
पात्र को अपात्र, अपात्र को पात्र
कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज़ समय पर जमा किए थे, इसके बावजूद उन्हें केवल लिफाफे में पदनाम न लिखने के कारण *अपात्र* घोषित कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर, कई ऐसे अभ्यर्थी जिनके दस्तावेज़ अधूरे थे, उन्हें *पात्र* माना गया। यह दोहरा मापदंड स्पष्ट रूप से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
परीक्षा व्यवस्था में भी भारी अव्यवस्था
भर्ती परीक्षा से एक दिन पूर्व, *5 सितंबर की शाम 5 बजे* दावा-आपत्ति निराकरण सूची जारी की गई, जबकि परीक्षा *6 सितंबर को सुबह 11 बजे* निर्धारित थी। इससे दूर-दराज से आए अभ्यर्थियों को तैयारी और संशोधन का समय तक नहीं मिल पाया।
परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम यह रहा कि न तो अभ्यर्थियों को रोल नंबर मिले, न ही परीक्षा कक्षों में समुचित व्यवस्था की गई। जिससे परीक्षा की गोपनीयता और गंभीरता पर सवाल उठे।
राजनीतिक हस्तक्षेप और पक्षपात के आरोप
अभ्यर्थियों का यह भी आरोप है कि दोरनापाल क्षेत्र के कुछ राजनीतिक नेताओं की सिफारिश पर एक अभ्यर्थी को *नियत समय से दो घंटे देर से पहुंचने के बावजूद परीक्षा में शामिल* कर लिया गया, जबकि अन्य अभ्यर्थियों को *पाँच मिनट की देरी पर भी बाहर कर दिया गया।* यह सीधा पक्षपात और नियमों की अवहेलना है।
अधिकारियों का बेरुखा रवैया
अपात्र घोषित किए गए अभ्यर्थियों ने जब CMHO और कलेक्टर से मिलने की कोशिश की तो उन्हें *मिलने से मना कर दिया गया*, यहाँ तक कि शिकायत सुनने के बजाय *दरवाज़ा बंद कर दिया गया।* इससे साफ है कि प्रशासन अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहा है।
भर्ती के नाम पर खिलवाड़
अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ अधिकारी और नेता *भर्ती को कमाई का जरिया* बना बैठे हैं। योग्य अभ्यर्थियों को अपात्र घोषित कर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आए बेरोज़गार युवाओं को इस प्रक्रिया ने हताश और अपमानित किया है।
शासन-प्रशासन की चुप्पी
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सुकमा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन गंभीर आरोपों पर कोई जवाब देगा?
क्या मुख्यमंत्री तक यह आवाज़ पहुँचेगी, या यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा?*
फारवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह गौर मांग किया हैं
पूरी चयन प्रक्रिया की *स्वतंत्र जांच* कराई जाए।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई* की जाए।
भर्ती प्रक्रिया को निरस्त* कर निष्पक्ष रूप से दोबारा परीक्षा कराई जाए।
दोहरा मापदंड बंद किया जाए* और योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिले।
यह सिर्फ युवाओं के भविष्य का सवाल नहीं, प्रशासनिक जवाबदेही और भर्ती की पारदर्शिता का भी इम्तिहान है। अगर पात्र अभ्यर्थियों के साथ न्याय नहीं हुआ तो पार्टी उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है




