खाद उवर्रकों की काला बाजारी में शासन प्रसासन आमने -सामने

खाद उवर्रकों की काला बाजारी में शासन प्रसासन आमने -सामन
अधिकारियों के सरंक्षण में चल रहा है पूरा अबैध व्यापार

 


लाखो रुपये लेकर कार्यवाही नही करने का आरोप

भारतीय किसान यूनियन ने मुख्य सचिव कृषि विभाग रायपुर को सोपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि कृषि आदान केन्द्रों पर किसानों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक दर पर उर्वरक जैसे कि यूरिया, पोटाश, सुपर फॉस्फेट आदि बेचे जा रहे हैं।
तात्कालिक घटना
1. 1 दिनांक 30 जुलाई 2025 कृषि केंद्र अंबागढ़ चौकी जैसे प्रतिष्ठानों में निरीक्षण के दौरान नकली Humic Acid 55% , Seaweed 10% ( काला हीरा ) उत्पाद ( फार्मर बायो क्रॉप साइंस ) की बिक्री पाई गई है। जिसमे निरीक्षण के दौरान अगरबत्ती बनाने वाला पावडर एवं कोयला का चूर्ण मिला जिसकी खबर सम्बंधित्त अधिकारियो को देने के पश्च्यात भी कोई कार्यवाही नहीं किया गया
2. दिनांक 31 जुलाई 2025 को किसानों की शिकायत पर खैरागढ़ स्थित हिंगलाज कृषि केंद्र
( प्रोपराइटर: पराग खत्री, राजनांदगांव रोड) में उपसंचालक कृषि विभाग राजकुमार सोलंकी के नेतृत्व में निरीक्षण की गई।
इस दौरान यह पाया गया कि केंद्र में यूरिया, डीएपी, पोटाश और सुपर फास्फेट जैसे उर्वरक निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेचे जा रहे थे, जो उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 का स्पष्ट उल्लंघन है।
हालांकि कार्यवाही केवल यूरिया खाद तक सीमित रही, जबकि अन्य उर्वरकों की कालाबाजारी की भी शिकायतंध सामने आई थीं। जब इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के विधिक सलाहकार अधिवक्ता महेन्द्र कुमार साहू ने उपसंचालक श् सोलंकी से पूछा कि कार्यवाही अधूरी क्यों की गई, तो उन्होंने उत्तर दिया:
“मैं सक्षम अधिकारी हूं, कार्यवाही अपने अनुसार करूंगा।”
साथ ही, उन्होंने किसी भी विस्तृत चर्चा से स्पष्ट इंकार कर दिया।
इस व्यवहार ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं और आशंका को बल मिला है कि अन्य जिलों में हो रही रासायनिक खाद की कालाबाजारी कहीं न कहीं प्रशासनिक संरक्षण में संचालित हो रही है। जिसकी शिकायत निरंतर मिल रही हे
इस प्रकार की स्थिति समूचे प्रदेश में व्याप्त प्रतीत होती है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन गतिविधियों में कुछ कृषि अधिकारियों की मिलीभगत की शिकायतें भी सामने आई हैं। निरीक्षण या नियंत्रण की प्रक्रिया से बचने हेतु कुछ अधिकारी जानबूझकर अवकाश पर चले जाते हैं या निरीक्षण के समय अनुपस्थित रहते हैं। यह दर्शाता है कि ऐसी अवैध गतिविधियाँ कहीं-न-कहीं उनके मौन समर्थन या लापरवाही के कारण फल-फूल रही हैंइसके अतिरिक्त कई दुकानों में वैज्ञानिक रूप से अप्रासंगिक उत्पाद जैसे कि “झाईम”, पीजीआर. नैनो उर्वरक. ( युरिया डीएपी) इत्यादि को उर्वरक अथवा पोषक तत्व के रूप में बेचा जा रहा है, जिनका फसलों की गुणवत्ता या उत्पादन से कोई सीधा संबंध नहीं है।
इन सभी गतिविधियों द्वारा निम्नलिखित वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है:
1. उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985
2. बीज अधिनियम, 1966 एवं बीज नियम, 1968
3. बीज नियंत्रण आदेश, 1983
4. कीटनाशक अधिनियम, 1971
इसके अतिरिक्त निम्नलिखित अनियमितताएं व्यापक रूप से देखी गई हैं:
1. बिना गुणवत्ता प्रमाणीकरण के उत्पादों की बिक्री
2. मूल्य सूची का प्रदर्शन नहीं किया जाना
3. उत्पादों पर विधिसम्मत लेबलिंग का अभाव
4. जिला कृषि अधिकारियों द्वारा समय पर जांच नहीं किया जाना
इस स्थिति के कारण किसान समुदाय न केवल आर्थिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी अत्यधिक पीड़ित है। कर्ज और नुकसान के चलते कई किसान आत्महत्या जैसे भयावह कदम उठाने को विवश हो रहे हैं।
अतः आपसे निवेदन है कि:
1. उपरोक्त उल्लंघनों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कर दोषी व्यापारियों और अधिकारियों पर वैधानिक कार्यवाही की जाए।
2. जिन अधिकारियों ने जानबूझकर निरीक्षण से बचने हेतु छुट्टी ली अथवा शिकायतों की अनदेखी की, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
3. नकली एवं अप्रमाणित उत्पादों से किसानों को हुई क्षति की भरपाई हेतु प्रक्रिया आरंभ की जाए।
4. सभी जिलों में सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाए और भविष्य के लिए एक पारदर्शी निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
अतः निम्नलिखित कृषि आदान केन्द्रों पर निरीक्षण सुनिच्चित किया जाये एवं 7 दिनों के भीतर जानकारी प्रदान किया जाये कि शिकायतों पर स्पष्ट उत्तर दें तथा आपके द्वारा कितने कृषि केन्द्रों पर कार्यवाही किया गया अन्यथा भारतीय किसान यूनियन के द्वारा पुरे प्रदेश में जिला स्तर ,ब्लॉक स्तर एवं तहसील स्तर पर खाद एव उर्वरक सोसायटी ,कृषि केन्द्रों के समक्ष जागरूकता अभियान चलाने की बात कही ओर दर्जनों कंपनी की लिखित शिकायत की गई है AVK क्रॉप साइंस रायपुर ( काला हिरा ) , फार्मर क्रॉप साइंस दुर्ग ( काला हीरा)
,MBF ( महाराष्ट्र बायो फर्टिलाइजर ) काला सोना लातूर
,कोटेक्स अग्रि साइंस रायपुर ,पवार एग्रो साथ प्रदेश सरकार को अबगत कराया है कि प्रदेश में कृषि संबंधी कार्यों हेतु शासन द्वारा भारी मात्रा में राजस्व व्यय किया जा रहा है, जिसमें निम्न अधिकारी-कर्मचारी सम्मिलित हैं:
1. 4 उप-संभागीय अधिकारी,
2. 33 जिलों में कृषि उप-संचालक,
3. प्रत्येक विकासखण्ड में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं सहायक संचालक,
4. हजारों की संख्या में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं ग्रामीण उद्यानिकी विस्तार अधिकारी।
साथ ही साथ निम्नलिखित विभागों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है:
1. कृषि विभाग
2. पशुपालन विभाग
3. बीज प्रमाणीकरण संस्था
4. जैव प्रौद्योगिकी विभाग
5. वाणिकी विभाग
6. मंडी बोर्ड
7. आत्मा परियोजना
इन सभी विभागों के अंतर्गत लाखों-करोड़ों रुपये के वेतनभत्ते, योजनाएं और संसाधन खर्च किए जा रहे हैं, किन्तु धरातल पर इनका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है। किसानों को समय पर खाद, बीज, तकनीकी जानकारी, उचित मूल्य व मंडी सेवाएं प्राप्त नहीं हो पा रही हैं। न ही नकली बीजों और उर्वरकों की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।
यह स्पष्ट रूप से शासकीय कार्यों में लापरवाही, अकर्मण्यता और राजस्व की हानि को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में निवेदन है कि:
1. उक्त समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
2. संबंधित विभागों की विफलताओं की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
3. जिनसे शासन को वित्तीय हानि हुई है, उनसे रिकवरी सूट नोटिस जारी कर 15 दिवस के भीतर कार्यालय में समस्त विवरण सहित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएं।
4. दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सेवा से पृथक किया जाए।
आपसे अपेक्षा है कि जनहित और शासकीय कार्यों की निष्पक्षता को बनाए रखने हेतु शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।

 

 

 

 

 


वहीँ भारतीय किसान यूनियन के विधिक सलाहकार और ओ बी सी यूनाइटेड फ्रेट ऑफ़ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार साहू ने क़ृषि विभाग मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन रायपुर से छत्तीसगढ़ के अधिकतर जिले के क़ृषि विभाग सहित सम्बंध्य विभागों के अधिकारियो एवं कर्मचारियों कि शासकीय दायित्वों मे घोर लापरवाही पर कार्यवाही करने कि शिकायत कि है जिसमे 4 उप संभागीय अधिकारी, 33 जिलों me क़ृषि उप संचालक, प्रत्येक विकासखंड मे वरिष्ठ क़ृषि विकास अधिकारी एवं साहयक संचालक, एवं हजारों कि संख्या में ग्रामीण क़ृषि विस्तार अधिकारी एवं ग्रामीण उधानिकी विस्तार अधिकारी कि शिकायत सहित वहीँ उक्त समस्त अधिकारियो और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नीलाबित करने, संबधित विभागों कि विफलताओं कि उच्च स्तरीय जांच, जिनसे शासन को वित्तीय हानि हुई है उनसे रिकवरी एवं दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही 15 दिनों कि भीतर करने कि मांग कि है अगर ऐसा नहीं हुआ तो भारतीय किसान यूनियन रोड कि लड़ाई लड़ने कि चेतवनी दी है

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