मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में नवाचार के युग का अंत?
सस्पेंशन की कार्रवाई के बीच याद आए मनीष कश्यप के ‘ग्रीन विजन’ और ऐतिहासिक कार

मनेन्द्रगढ़,
मनेन्द्रगढ़ वन मंडल के डीएफओ मनीष कश्यप के निलंबन की खबर ने जहाँ प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, वहीं क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमी और ग्रामीण उनके कार्यकाल के दौरान हुए अभूतपूर्व कार्यों को याद कर रहे हैं। विवादों से इतर, मनीष कश्यप का कार्यकाल मनेन्द्रगढ़ वन मंडल के लिए ‘नवाचार और संरक्षण’ का स्वर्ण काल माना जा रहा है।
एशिया का सबसे बड़ा मरीन फॉसिल पार्क: एक वैश्विक पहचान
मनीष कश्यप के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क का कायाकल्प रहा। लगभग 29 करोड़ साल पुराने समुद्री जीवाश्मों को संरक्षित कर उन्होंने न केवल इसे एशिया के सबसे बड़े मरीन फॉसिल पार्क के रूप में स्थापित किया, बल्कि मनेन्द्रगढ़ को विश्व पर्यटन के मानचित्र पर ला खड़ा किया। उनके विजन से ही यहाँ छत्तीसगढ़ का पहला जुरैसिक रॉक गार्डन विकसित हुआ, जहाँ पत्थरों को तराश कर डायनासोर और प्राचीन जीवों की कलाकृतियाँ बनाई गई हैं।
‘महुआ बचाओ अभियान’: आदिवासियों की अर्थव्यवस्था को नई संजीवनी
वन मंडल में विलुप्त होते महुआ के पेड़ों को बचाने के लिए उन्होंने ‘महुआ बचाओ अभियान’ शुरू किया।
नवाचार: पहली बार जंगलों से बाहर खाली पड़े गौठानों और खेतों की मेड़ों पर ट्री-गार्ड के साथ महुआ के पौधे रोपे गए।
प्रभाव: इस अभियान के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ‘नेक्सस ऑफ गुड’ (Nexus of Good) अवार्ड से सम्मानित किया गया। उनके इस प्रयास ने स्थानीय आदिवासियों के लिए भविष्य की आय का एक स्थायी स्रोत सुनिश्चित किया।
मियावाकी पद्धति: शहर के बीच खड़े किए 5 ‘मिनी फॉरेस्ट’
बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए उन्होंने जापानी तकनीक ‘मियावाकी’ का सहारा लिया। मनेन्द्रगढ़ शहर के बीचों-बीच 5 स्थानों पर घने मिनी फॉरेस्ट विकसित किए गए, जो पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में 30 गुना अधिक तेजी से बढ़ते हैं और अधिक ऑक्सीजन देते हैं।
एक नज़र में प्रमुख उपलब्धियां:योजना/कार्य मुख्य प्रभाव
मरीन फॉसिल पार्क एशिया के सबसे बड़े जीवाश्म स्थल को पर्यटन केंद्र बनाया।
महुआ बचाओ अभियान 1.12 लाख से अधिक पौधों का रोपण, राष्ट्रीय सम्मान।
मियावाकी वृक्षारोपण शहरी क्षेत्रों में ‘अर्बन फॉरेस्ट’ की स्थापना।
कैरियर काउंसलिंग IIT खड़गपुर से पास आउट होने के नाते स्थानीय छात्रों का मार्गदर्शन।हमारा लक्ष्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि इस दुर्लभ भूगर्भीय विरासत को इस तरह पेश करना था कि यह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करे।”
— मनीष कश्यप (IFS 2015)
निष्कर्ष:
हालांकि प्रशासनिक कारणों से उन पर कार्रवाई हुई है, लेकिन मनेन्द्रगढ़ के जंगलों और यहाँ के पर्यटन स्थलों पर उनकी कार्यशैली की छाप लंबे समय तक दिखाई देगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके जाने से जारी कई विकास कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है।




