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डॉ. बिजेंद सिन्हा जी का संपादकीय लेख “कैंसर रोगियों की बढ़ती संख्या चिंताजनक”।

Cg24News-R :- व्यक्ति की जीवनशैली और उसके स्वास्थ्य के मध्य गहरा संबंध है। एक संयमित एवं अनुशासित जीवनशैली एक स्वस्थ व नीरोग जीवन का आधार बनता है तो वहीं जीवनशैली से जुड़ी अस्त-व्यस्तता एवं विकृति लम्बे समय में बहुत भारी पड़ जाती है और जीवन अनेक प्रकार के रोगों एवं विकारों से आक्रांत हो उठता है। जैसे-जैसे भौतिकता व उपभोक्तावादी संस्कृति हावी होता गया वैसे-वैसे रोग बढ़ ते गए। स्वस्थ व संतुलित जीवनशैली रोगों से जुड़े विकारों से लड़ने का सरल एवं प्रभावी उपाय सिद्ध होती है। कैंसर भी जीवन शैली से जुड़ा एक भयावह रोग है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आज के तनाव पूर्ण जीवन के कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही हैं जिसके कारण श्वेत रक्त कोशिकाएं शरीर में प्रवेश करनें वाले वायरस से लड़ने की शक्ति खो बैठती है। इसके कारण कोशिकाओं का अनियन्त्रित विकास होने लगता है जो बाद में कैंसर के रूप में प्रकट होता है। कैंसर कई कारण से पनप सकता है। दीर्घ कालीन धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का तथा धूप का संसर्ग त्वचा कैंसर का कारण बनता है।
डिजिटल तकनीक का बढ़ता प्रभाव, शारीरिक श्रम का अभाव, शारीरिक गतिहीनता, आरामपसन्दगी व सुविधायुक्त जीवन शैली के कारण कई गम्भीर शारीरिक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली की पहचान बन रहे डिजिटल तकनीक,इन्टरनेट, मोबाइल, टीवी ने लोगों को संचार एवं ज्ञान विकास के साथ रोग भी दिये हैं। हम प्राकृतिक जीवनशैली से दूर होते जा रहे हैं। उच्च रक्तचाप डायबीटीस हृदय रोग कैंसर किडनी संबंधी रोग एड्स आदि गम्भीर रोग बढ़ते जा रहे हैं। गौरतलब है कि वर्तमान समय में कम उम्र में ही रोगों का शिकार होना चिन्तन का विषय है। गौरतलब है कि देश में युवाओं में हृदय रोगों का खतरा पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है।युवाओं में बढ़ रही हार्ट अटेक व कैंसर की समस्या राष्ट्रीय खतरे जैसा है।युवाओं का नशे की ओर प्रवृत्त होना कई घातक रोगों का कारण है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर भविष्य के लिए सरकार व समाज को ध्यान देने की जरूरत है। गम्भीर रोगों से सम्बंधित मुद्दों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता में रखना चाहिए। स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाने के लिए सुदृढ़ स्वास्थ्य नीति की आवश्यकता है।
ज्ञातव्य है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट भी अनेक प्रकार के रोगों को बढ़ा रहे हैं। बदलते आहार, मिलावटी भोजन, मिलावटी खाध्य पदार्थ कैंसर के जोखिम को बढ़ा रहे हैं।बदलते आहार,मिलावटी भोजन, मिलावटी खाध्य पदार्थ कैंसर के जोखिम को बढ़ा रहे हैं। खाद्य सुरक्षा पर कड़े नियम व कानून लागू करने की जरूरत है जिससे मिलावट व प्रदूषण से बचाव हो सके एवं इन बीमारियों से बचा जा
बदलते टेक्नोलॉजी के दौर में प्लास्टिक का तेजी से उपयोग होने लगा है। खान-पान में प्लास्टिक का उपयोग भी कैंसर को बढ़ावा दे रहा है। सुविधाभोगी जीवनशैली और फैशनपरस्ती के चलते मौजूदा दौर में प्लास्टिक दैनिक जीवन के उपयोगी वस्तुओं का हिस्सा बनते जा रहा है।खान-पान में भी अधिकतर प्लास्टिक का उपयोग होने लगा है। प्लास्टिक के माध्यम से भोजन पानी व अन्य खाद्य पदार्थों के सेवन से माइक्रोप्लास्टिक शरीर में प्रवेश कर जाते हैं जिससे कई गम्भीर बीमारियां हो सकती हैं। पहले लोग खान पान में मिट्टी के बर्तन कांस्य पीतल जैसे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक धातुओं के बर्तनों का उपयोग करते थे। खाने-पीने में ऐसी गतिविधियां उन्हें स्वस्थ रखती थीं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार कांसे व पीतल के बर्तन का उपयोग स्वास्थ्यप्रद है। खाने-पीने में इनका उपयोग किसी औषधि से कम नहीं माना जाता। कांसे व पीतल के बर्तन का उपयोग करना छोड़ प्लास्टिक व कांच के बर्तन में खाना खाकर हम अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।प्लास्टिक के बोतल बन्द पानी भी शरीर में प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। यह कई गम्भीर बीमारियों को जन्म देती हैं। एक अध्ययन के अनुसार प्लास्टिक की चीजों में खाना खाने से कैंसर हार्ट अटेक डायबीटीस व अन्य गम्भीर बीमारियां होती हैं। इन सभी बीमारियों से बचने के लिए प्लास्टिक के उपयोग से बचने की जरूरत है। इन स्वास्थ्यगत समस्याओं को देखते हुए हमें स्वतःस्फूर्त होकर सिंगल यूज प्लास्टिक समेत प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।
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