Cg24News-R :- यह विडम्बना ही है कि लोग सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश तो करना चाहते हैं पर उनका दृष्टिकोण अति संकीर्ण होता है। राजनीति को ही सब कुछ समझा जाने लगा है। सच तो यह है कि अपने देश का पिछड़ापन दूर करने में उतनी सफल नहीं हो सकती, जितनी कि सामाजिक क्षेत्र में की गई सेवा-साधना।वर्षों की गुलामी से अपना सब कुछ खो बैठने वाले समाज में संव्याप्त नैतिक बौद्धिक आर्थिक शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र के पिछड़ापन को दूर किया जाना सबसे बड़ा काम है, और उसे सिर्फ राजनीति द्वारा ही नहीं सामाजिक सत्प्रवृत्तियों द्वारा पूरा किया जा सकता है। बढ़ती अश्लीलता, जीवनमूल्यों रक्षार्थ साहित्य का अभाव, , वर्तमान दौर में पुस्तकों के प्रति अरुचि ,खर्चीली शादीयां, नशा, छुआ-छूत, जातिगत भेदभाव, गृह उद्योगों का अभाव, सृजनात्मक फिल्म का अभाव, अन्न की बर्बादी, पौष्टिक आहार की कमी, कुपोषण,भिक्षावृत्ति, उपभोक्तावाद के कारण अपव्यय, बाल विवाह,आनर किलिंग ( झूठी शान की आड़ में अपनी ही युवा सन्तानों की निर्मम हत्या), कन्या भ्रूण हत्या, बढ़ते प्लास्टिकीकरण, दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुओं व जीवनदायनी खाद्य पदार्थों का रसायन युक्त होना, नशे का बढ़ता कारोबार , समाज में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ,बढ़ते अपराध, निरन्तर बढ़ते रोग,कम उम्र में ही गम्भीर रोगों से ग्रस्त रोगियों की बढ़ती संख्या ,पशुओं के साथ बरती जाने वाली निर्दयता ,गौपालन के प्रति अरुचि व पर्यावरण प्रदूषण आदि कई समस्याएं हैं जिन्हें रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर बहुत कुछ किया जा सकता है। अश्लीलता पर कुठाराघात की भी जरूरत है। इनसे पार पाने के लिए वैचारिक क्रांति की जरूरत है । इस दिशा में आवश्यक नहीं कि सरकार ही सब कुछ करे, सामाजिक क्षेत्र में भी इस दिशा में बहुत कुछ किया जा सकता है। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए नैतिक आधार पर सामाजिक एवं वैचारिक क्रांति लानी होगी।