पाटन के अमलीडीही में हुआ “सहजानंद अंतरराष्ट्रीय गुरुकुल (विद्यालय)” का भूमिपूजन, पहुंचे सांसद एवं शिक्षामंत्री

दुर्ग पाटन : आज 13 जून को विकास खंड पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत अमलीडीही में श्री सहजानंद अंतरराष्ट्रीय गुरुकुल (विद्यालय) का भूमिपूजन दुर्ग सांसद एवं शिक्षामंत्री के करकमलो से किया गया। बतादें कि, गुरुकुल परंपरा, शिक्षा का एक प्राचीन भारतीय दर्शन रहा है, जो ज्ञान और चरित्र निर्माण पर केंद्रित हैं। गुरुकुल परंपरा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदाय करना ही नहीं था, बल्कि छात्रों को आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का भी शिक्षा देना था। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली ने सदियों से ज्ञान का संरक्षण और प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह बात शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज महादेव घाट रोड स्थित मोतीपुर अमलीडीह में सहजानंद अंतरराष्ट्रीय गुरुकुल रायपुर छत्तीसगढ़ के नूतन गुरुकुल के भूमिपूजन के अवसर पर कही। श्री अग्रवाल ने नूतन गुरूकुल का भूमिपूजन कर परिसर में वृक्षारोपण किया।

वही दुर्ग सांसद विजय बघेल ने गुरुकुल की आधार शिला रखते हुए ,कहा कि गुरुकुल की परंपरा से यह आधुनिक समाज, संस्कार, संस्कृति, शिष्टाचार, सामाजिक जागरूकता, मौलिक अधिकार, बौद्धिक विकास और सभ्यता जैसे अमूल्य गुन से अपने आने वाली पीढ़ी को विरासत में दे सकता है। वही कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रायपुर लोकसभा सासंद एवं छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और दुर्ग लोकसभा के लोकप्रिय सासंद विजय बघेल रहे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में दुर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चंद्राकर ,पूर्व विधायक देवजी पटेल,जिला पंचायत सदस्य हर्षा लोकमनी चंद्राकर, मंडल अध्यक्ष लालेश्वर साहू,जनपद सदस्य घनश्याम कौशिक, उतरा सोनवानी, रेवती सोनकर रहे।

कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए हमे शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य करने की आवश्यकता है। जिसमें गुरुकुल परंपरा अहम भूमिका निभायेगी। भारत की गुरुकुल प्रणाली शिक्षा और संस्कृति का एक अनूठा संगम रहा हैं। जिसके कारण विश्व में भारत की एक अलग पहचान है। गुरुकुल परंपरा से ही संस्कार, संस्कृति, शिष्टाचार, समाजिक जागरुकता, मौलिक व्यक्तित्व, बौद्धिक विकास जैसे अमूल्य गुणों को अपनी आने वाली पीढ़ियों को विरासत में दे सकते हैं।

वही शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ वासियों के लिए सौभाग्य की बात है कि भारत की इस दिव्य विरासत जीवित रखने के लिए यहां गुरुकुल की स्थापना की जा रही है। उन्होंने इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए शास्त्री श्री घनश्याम प्रकाश दासजी एवं श्री कृष्णवल्लभ दासजी के प्रति आभार प्रकट किया।

इस शुभ अवसर पर शास्त्री श्री घनश्याम प्रकाश दास जी, श्री कृष्णा श्री कृष्ण बल्लभ दास जी श्री हर्षद पटेल जी सहित प्रकाश चंद्राकर, सासंद प्रतिनिधि राजेश चंद्राकार,फेरहा राम धीवर, कैलाश यादव, राजू साहू,मनीष साहू, कमलेश चंद्राकार, धर्मेंद्र सोनकर,आलोक पाल, शिवा साहू, दुर्भासा साहू, अशोक निषाद, तोरण साहू , दयानंद सोनकर एवं ग्राम पंचायत के सरपंच पंच गण सहित ग्रामवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक मोहित शर्मा ने किया। आभार व्यक्त गुरुकुल के शास्त्री ने किया।

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