
राजनांदगांव _धान भारत सहित एशियाई एवं विश्व के कई देशों में मुख्य भोजन है। हमारे देश की लगभग 70-80% जनसंख्या भोजन के रूप में धान पर निर्भर है। जिसका उत्पादन लगभग 11 करोड़ एकड़ में किया जाता है भारत धान उत्पादन में विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है लेकिन उत्पादकता (प्रति एकड़ उत्पादन) में 52वें स्थान में है। धान की खेती दो तरीके से किसान करते है पहला सीधी बिजाई और दूसरा रोपाई विधि, लेकिन दोनों विधियों में किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे अप्रभावी खरपतवार एवं करगा नियंत्रण, मजदूरों की आवश्यकता (रोपाई एवं निदाई के लिए), अधिक पानी की आवश्यकता, ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन (रोपाई विधि में), भूजल स्तर में लगातार गिरावट। इन सभी समस्याओं का समाधान किसानों को फुलपेज तकनीकी में मिलता है यह तकनीकी सीधी बिजाई को बनाती है और भी आसान, मिलता है बेहतर अंकुरण एवं स्वस्थ फसल साथ ही प्रभावी खरपतवार एवं जंगली धान पर नियंत्रण।
फुलपेज एक नई तकनीकी है जो धान उत्पादकों के लिए बहुत ही लाभकारी है, इस तकनीकी के आने से धान की सीधी बिजाई हुई और भी आसान, कम लागत में अधिक उत्पादन साथ ही खरपतवार, करगा एवं मजदूरों से छुटकारा। फुलपेज तकनीकी में किसानो की रोपाई में लगने वाले मजदूरों से मिली मुक्ति, खेत मचाई का खर्चा बचा और खरपतवार, करगा की समस्या से मिला निधान।

कृषकों को फुलपेज तकनीकी की जानकारी देने के लिए ग्राम राजाभानपुरी में फसल प्रदर्शन एवं किसान बैठक रखी गई जिसमें परायन एलायंस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मार्केट डेवलमेंट मैनेजर डॉ विकास सिंह ने फुलपेज तकनीकी को विस्तार पूर्वक किसानों को समझाया एवं तकनीकी से संबंधित किसानों की समस्त भ्रांतियां दूर की। कार्यक्रम में लगभग 90 से ज्यादा किसान उपस्थित रहे और इस तकनीकी की जानकारी प्राप्त की। डॉ विकास में बताया कि धान की बुवाई सीडड्रिल के माध्यम से करें जिसमें बीज की मात्रा 10.5 कि.ग्रा. प्रति एकड़ साथ ही बुवाई के समय 1 बोरी डीएपी का प्रयोग करना है। किसान भाइयों को फुलपेज तकनीकी में बीज के साथ दो बार छिड़काव के लिए वजीर नामक नींदानाशक दी जाती है। जिसका पहला छिड़काव बुआई (धान जगने) के 10-12 दिन में एवं दूसरा छिड़काव 25-30 दिन पर करना है। वजीर नींदानाशक के दोनों छिड़काव सही समय पर होने पर खेत से लगभग सभी प्रकार के जंगली धान, करगा, पुराना धान, खरपतवार एवं अन्य वन पूर्णता नियंत्रित हो जाते है। विशेष तौर पर किसान हमेशा करगा, जंगली धान से बहुत परेशान रहता है इसको निकालने के लिए किसान मजदूरों पर निर्भर रहता है मजदूरों पर 10-15 हजार खर्च करने के बाद भी नियंत्रण प्राप्त नहीं होता है जिससे किसानों की लागत बढ़ जाती है।
राजाभानपुरी के प्रगतिशील कृषक रविकांत साहू ने अपने 2 एकड़ खेत में फुलपेज तकनीकी वाला धान लगाया है उन्होंने अपना अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा किया और किसान भाइयों को सलाह दी कि आने वाले वर्षो में अधिक से अधिक इस तकनीक का उपयोग करें और कम लागत में अच्छी फसल प्राप्त करें। इस तकनीक में किसानों को रोपाई और निंदाई में लगने वाले खर्च का सामना नहीं करना पड़ेगा। फुलपेज तकनीकी वाली धान की वर्तमान फसल स्तिथि को देखकर किसानों ने इसके उत्पादन का आंकलन 20 से 25 क्विंटल के आसपास कर रहे हैं। फसल देखकर कार्यक्रम में उपस्थित किसानों में अत्यंत हर्ष एवं उत्साह व्याप्त है।




