*मानवता की पुनर्स्थापना कर रही संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम*
दुर्ग : भारतवर्ष में आज भी लाखों लोग ऐसे हैं जो जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित हैं। किसी के पास दो वक्त की रोटी नहीं, तो कोई छत और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्षरत है। दुर्ग जिला तहसील पाटन के ग्राम जामगांव एम के रहने वाले राकेश कुमार रात्रे का परिवार भी ऐसी ही कठिन परिस्थिति से जूझ रहा है।
चार सदस्यीय इस परिवार का सहारा राकेश कुमार रात्रे अब किडनी की गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं और नियमित डायलिसिस पर हैं। आर्थिक अभाव के कारण रायपुर के सरकारी अस्पताल में उनका ईलाज भी बंद हो गया है। अब वे किसी भी प्रकार की मजदूरी या कार्य करने की स्थिति में नहीं हैं। घर की समस्त जिम्मेदारी उनकी पत्नी आशा बाई रात्रे के कंधों पर आ गई है, जो खुद मजदूरी कर किसी प्रकार परिवार की गुजर-बसर कर रही हैं।
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इस परिवार के पास न खुद का मकान है और न ही किसी प्रकार की स्थायी सहायता। ऐसी ही विषम परिस्थितियों में संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही “अन्नपूर्णा मुहिम” ऐसे परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। 5 अगस्त को संत रामपाल जी महाराज की ओर से अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत इस जरूरतमंद परिवार को राहत पहुंचाई गई। उन्हें आटा, चावल, दाल, तेल, नमक जैसी रोजमर्रा की आवश्यक खाद्य सामग्री 1 महीने की बिल्कुल निःशुल्क प्रदान की गई।
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परिवार को बताया गया कि यह राशन नियमित रूप से तब तक प्रदान की जाएगी जब तक उनके हालात सामान्य नहीं हो जाते। इस मुहिम के तहत राकेश रात्रे का नाम और Contact नंबर भी दर्ज कर लिया गया है, ताकि समय-समय पर और भी सहायता दी जा सके। गांव के सरपंच सहित कई ग्रामीण जनों ने इस सेवा कार्य की सराहना की। संत रामपाल जी महाराज की ओर से चल रही “अन्नपूर्णा मुहिम” केवल राहत सामग्री पहुँचाने का कार्य नहीं है, बल्कि मानवता की पुनर्स्थापना का कार्य है। वर्तमान में उनकी “अन्नपूर्णा मुहिम” देश के कोने-कोने में जरूरतमंदों तक पहुंचने लगी है। इस मुहिम में राज्य सेवादार दुष्यंत दास, जिला संयोजक खेमेंद्र दास सहित संत रामपाल महाराज के अन्य शिष्य मौजूद थे।




