Breaking News
भालूडिग्गी एवं मटाल की पहाड़ी श्रृंखला में माओवादीयों द्वारा डंप हथियार व हथियार निर्माण उपकरण बरामद
*छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग – शिक्षक फेडरेशन*
*छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग – शिक्षक फेडरेशन*
डॉ. बिजेंद सिन्हा जी का संपादकीय लेख “सच्ची सफलता”।

Cg24News-R :- हाल ही में स्थानीय चुनाव सम्पन्न हुए। इसमें राजनैतिक जीत हासिल करने के कई ढ़ंग देखे गए। कहीं-कहीं कटुता भी उभरकर सामने आई। सफलता हासिल करने के कई तरीके अपनाए गए। पहले राजनीति में शुचिता थी। नैतिकता बाकी था ।इसलिए अनैतिक अवांछनीय हथकण्डे नहीं अपनाए जाते थे। निश्चित ही राजनीति जन सेवा का सशक्त माध्यम व विमर्श का विषय है। धीरे-धीरे राजनीति सत्ता केन्द्रित होती चली गई। सत्ता के सामने आदर्श व मूल्य सब व्यर्थ होते चले गए।लेकिन क्या वास्तव में अवांछनीय तरीके से अपनायी गयी सफलता सच्ची सफलता है सांसारिक मानदंडों में सफलता और असफलता के के गहरे अर्थ हो सकता है। सही मायने में सफलता भी किसी असफलता से अधिक असफल होती है। वास्तव मेँ सफलता एवं असफलता के के जो आधार हैं वे उच्च आदर्शों एवं लक्ष्य में निहित हैं। जो अपने आदर्शों व नैतिकता के साथ काम किया एवं आगे बढ़ा और अनगिनत बार असफल हुआ वह भी सफल कहलाएगा,।परन्तु जिसने आदर्शों व मूल्यों के साथ समझौता करके आदर्शों व मूल्यों को दरकिनार करते हुए सफलता अर्जित की वह सफल होकर भी असफल कहलाएगा। ऐसी सफलता को सौ बार हासिल कर ले तो भी सच्ची सफलता नहीं कही जा सकती। यदि हम किसी भी तरह तरह से किसी जोड़-जुगाड़ से सफल हो गए तो ऐसी सफलता सालती रहेगी अशान्त करेगी। इसके विपरीत श्रेष्ठ कर्म करने के पश्चात भी यदि हमें वांछित सफलता नहीं मिल पाती है तो हमारे अन्दर आत्मसंतोष रहता है। सच्ची सफलता इसी में है कि हम मूल्यों व आदर्शों के साथ मनोयोग से आगे बढ़ें।कई ऐसे महान व्यक्ति हुए हैं जो जीवन में सफल नहीं हो पाए पर उनके सफल नहीं होने पर उनके जीवन का मूल्यांकन नहीं होता। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, चन्द्रशेखर आजाद सफल नहीं हो पाए। उनके सामने देश आजाद नहीं हो सका। इसी तरह अनेक महापुरुषों योद्धाओं राजनीतिज्ञों के के जीवनकाल में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सका। परन्तु इस असफलता के बावजूद उनका जीवन उनके उद्देश्य की दृष्टि से सफल कहलाएग ये सभी वंदनीय हैं। क्योंकि इन्होंने इतने ऊँचे आदर्शों को अपनाया कि उनके बाद उनको प्रेरणास्रोत बनाकर चलने वालों की, संघर्ष करने वालों की कमी नहीं। इसके विपरीत सफलता प्राप्ति के अनेक ऐसे उदाहरण हैं जहाँ सफलता मिलने पर भी उनको श्रेयस्कर नहीं कहा जा सकता। यदि कोई अनैतिक अवांछनीय तरीके अपनाकर अनगिनत बार भी सफलता हासिल कर ले तो यह सच्ची सफलता नहीं है। ऐसे तरीके अपनाकर अनगिनत बार भी सफलता हासिल कर ले तो ऐसा कर लेने से उनकी सफलता वंदनीय नहीं हो जाती। जीवन में सच्ची सफलता यानि नीतिगत जीवन, आदर्शनिष्ठ जीवन। वास्तव मेँ सफल उसे कहते हैं जो आदर्शों व मूल्यों के साथ अपने लक्ष्य तक पहुंचता है।
ताज़ा खबरे


