डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख । “संत गुरु घासीदास के विचारों को फैलाने की जरूरत “


गौरतलब है कि आज के आधुनिक व वैज्ञानिक प्रगति के युग में भी कमोबेश जातिगत भेदभाव जैसे दूषित विचार कायम है जिसके दुष्परिणाम स्वरूप आज भी हिन्सात्मक घटनाए होतीं हैं। ऐसे मे बाबा का समानता का सन्देश अत्यंत प्रेरणीय है।गुरु जी का मनखे मनखे एक समान का सन्देश हम सबका आदर्श होना चाहिए। गुरु घासीदास का महत्वपूर्ण सिद्दांत मनखे मनखे एक समान था। जो समानता के सिद्धांत पर आधारित है। समानता का सिद्धांत हमारे भारतीय संविधान का महत्व पूर्ण हिस्सा है। स्पष्ट है कि भारतीय संविधान निर्मित होने से पहले ही संत घासीदास जी ने समानता का सन्देश दे दिया था। गुरु देव ने समतामूलक समाज की कल्पना की थी। जहां सभी लोग बराबर हो।जातीय भावनाओं को आहत करने वाली गतिविधियाँ नहीं होना चाहिए।सद्भाव हमारी संस्कृति का मूल है। ऐसा समाज ही आदर्श समाज है। गुरु जी के प्रकाश पूर्ण मार्ग दर्शन से समाज में नयी चेतना जागृत हुई। संत गुरु घासीदास ने नशा नहीं करने का उपदेश देकर दुरव्यसन मुक्त समाज का स्वप्न देखा था। जो आज के परिवेश में अत्यंत अनुकरणीय हैं। इसलिए नशामुक्ति को जीवन की अनिवार्य आवश्यकता मानते हुए नशे से दूर रहकर ही गुरु घासीदास के सपनों को साकार किया जा सकता है। आज सर्वाधिक आवश्यकता इसी की है। आज के माहौल में जब राजनीति व राजनीतिज्ञों को ही सब कुछ समझा जाने लगा है।ऐसे में संत गुरुओ महापुरुषो व समाज सुधारको द्वारा समाज व देश हित में किए गए सद्कायो सद्प्रयासो व आदर्श को याद करते हुए उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। वास्तव में संत गुरु व समाज सुधारक ही समाज के परम्परागत नायक होते हैं। जो जीवन के भौतिक व आध्यात्मिक प्रगति की राह दिखाते हैं। गुरु देव ने हमेशा सत्य आराधना की बात कही। समाज में इसी की जरूरत है।संत गुरु घासीदास के आदर्शों पर चलने से हम सभी कल्याण है। गुरु पर्व के शुभ अवसर पर संत गुरुघासीदास जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" के कंटेंट को कॉपी करना अपराध है।