*हम भारत के लोगों के व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता हेतु संविधान अपरिहार्य है*
*आधुनिक विश्व इतिहास के सर्व श्रेष्ठ साहित्य लेख हैं- भारत का संविधान*
*विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़ा लिखित श्रेष्ठ संविधान को प्रत्येक भारतीयों को जानना चाहिए*
तहसील सतनामी समाज पाटन के मार्गदर्शन में सुपर 50 प्लस ग्रुप द्वारा बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के जयंती 14अप्रैल के पूर्व 1अप्रैल से 13अप्रैल तक पाटन तहसील क्षेत्र के अलग अलग गांवों में जारी *शिक्षा एवं संविधान जागरूकता पखवाड़ा* के माध्यम से बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के आत्मा एवं उनके श्रेष्ठ रचना भारत के संविधान के प्रस्तावना में निहित जानकारी के साथ ही साथ लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से अभियान के दूसरे दिवस दक्षिण पाटन के ग्राम भनसुली आर में आयोजन रखा गया, जिसमें उपस्थित तहसील सतनामी समाज पाटन के पदाधिकारीगण एवं सुपर 50 प्लस के प्रबुद्धजनों व ग्राम भनसुली आर तथा आसपास के गांवों से आए हुए वक्ताओं ने विश्व इतिहास के आधुनिक काल में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के सबसे बड़े लिखित संविधान को सबसे श्रेष्ठ साहित्य लेख का सम्मान देते हुए भारत के संविधान से प्रत्येक भारतीयों की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाले बंधुता बढ़ाना निरूपित करते हुए प्रत्येक भारतीयों के लिए अपरिहार्य बताएं। वक्ताओं ने बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के द्वारा हम भारतीय को गौरवान्वित करने वाले भारत के संविधान निर्माण पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए आगामी 14 अप्रैल को राखी में पाटन तहसील स्तरीय बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जयंती समारोह पूर्वक आयोजित करने का संकल्प।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के संविधान का प्रस्तावना वाचन से किया गया।
उपस्थित बच्चों और ग्रामीणों तथा वक्ताओं को शिक्षा में प्रोत्साहन स्वरूप पेन भेंटकर सम्मानित किया गया।
शिक्षा एवं संविधान जागरूकता पखवाड़ा अंतर्गत प्रमुख वक्ता के रूप में तहसील सतनामी समाज पाटन के सचिव कौशल रात्रे, लोकेश महिलवार बसपा जिलाध्यक्ष दुर्ग, सोजलीफ सदस्य दिनेश जोशी, सरपंच एवं पूर्व सरपंच भनसुली आर, शिक्षादूत राजेन्द्र मारकण्डे, प्रभारी प्राचार्य सुरेन्द्र गायकवाड, शिक्षक हरिश्चंद्र देशप्यारे, समाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र प्रसाद मारकण्डे, मूशन धृतलहरे, शीतल कोठारी, लक्ष्मी प्रसाद बंजारे, स्वाति मारकण्डे प्रमुख थे।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में बच्चे, युवा, महिला एवं बुजुर्ग ग्रामीण उपस्थित रहे।




