किरीट ठक्कर, गरियाबंद : ग्राम सभा के प्रस्तावों के विरुद्ध साथ ही बिना प्रस्तावों के ग्राम सीमा क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा कराये जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर साथ ही अन्य कारणों के चलते आदिवासी समुदाय स्थानीय जिला प्रशासन से नाराज चल रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद अब उग्र आंदोलन की तैयारी कर रहा है।
विगत दिनों परिषद की बैठक के बाद जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 14 अकटुबर को आदिवासी विकास परिषद द्वारा कलेक्ट्रेट का घेराव किया जायेगा। आदिवासी समाज के नेतृत्व एवं उसके हितों की सुरक्षा के विरुद्ध छ.ग. शासन एवं प्रशासन द्वारा लिए जा रहे निर्णय से आदिवासी समाज के लोगों में इन दिनों आक्रोश व्याप्त है, जिसके फलस्वरूप गरियाबंद जिला स्तर पर आदिवासी समाज प्रमुखों द्वारा आदिवासी विकास परिषद भवन मजरकट्टा गरियाबंद में जिला स्तरीय बैठक आहूत कर विभिन्न स्थानीय तथा प्रदेश स्तरीय मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श कर निर्णय लिया गया कि आगामी 7 अक्टूबर से 13 अक्टूबर के मध्य गरियाबंद जिले के प्रत्येक गांव में छ.ग. शासन एवं गरियाबंद जिला प्रशासन के विरोध में पुतला दहन किया जाएगा। साथ ही 14 अक्टूबर 2022 को जिला कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया गया है।

क्या है प्रमुख मुद्दे
आदिवासी विकास परिषद गरियाबंद द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अवगत कराया गया है , कि जतमई गढ़ का संचालन वर्षों से ग्राम सभा समिति द्वारा किया जा रहा था , किंतु जिला प्रशासन द्वारा एकाएक ग्राम समिति को विश्वास में लिये बगैर बिना आम सहमति के, जिला प्रशासन द्वारा ही संचालित करने का निर्णय ले लिया गया। जबकि ग्राम सभा को स्वायत्त सरकार का दर्जा हासिल है फिर भी खिलवाड़ किया गया, इस तरह ग्राम सभा दंतविहीन इकाई बनकर रह गयी है।
ऐसे ही ग्राम सभा की स्वायत्तता पर लगातार गंभीर चोट की जा रही है। ग्राम पंचायतों की पारंपरिक सीमा में आने वाले सारे संसाधनों पर ग्राम सभा का संपूर्ण अधिकार होता है। ईसके बावजूद पूर्व ग्राम पंचायत पारागांव एवं पारागांव पंचायत से अलग होकर अस्तित्व में आई नव गठित ग्राम पंचायत डोगरीगांव की ग्राम सभा की आपत्ति के बाद भी नगर पालिका परिषद द्वारा पंचायत क्षेत्र में मटन मार्केट का निर्माण किया गया साथ ही दुकानें आबंटित कर मटन मार्केट संचालित किया जा रहा है, जो ग्राम सभा के अधिकारों का हनन है।
पिछले दिनों जनपद क्षेत्र गरियाबंद की एक आदिवासी महिला सरपंच के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले जनपद पंचायत गरियाबंद सीईओ के ऊपर कार्यवाही किये जाने की मांग आदिवासी समुदाय लगातार करता आ रहा है, किंतु अधिकारी पर किसी प्रकार की कार्यवाही नही होने की वजह से परिषद के प्रमुख आक्रोशित है। इन्हीं मुद्दों को लेकर आदिवासी समाज 7 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक जिले के प्रत्येक गांव में छ.ग. शासन एवं जिला प्रशासन का पुतला दहन करेंगे एवं 14 अक्टूबर को जिला कार्यालय का घेराव का निर्णय लिया गया है ।
चुनावी परिणाम बदलने में सक्षम है आदिवासी समुदाय
जिले के पांच विकासखंडों में से तीन पूरी तरह पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आते हैं तथा दो आंशिक रूप से पांचवी अनुसूची में शामिल हैं। अनुमानतः जिले में आदिवासियों की जनसंख्या 1लाख 20 हजार के करीब है जो कि जिले की कुल जनसंख्या का 40 से 44 प्रतिशत होता है।

आदिवासी विकास परिषद की बैठक में लोकेश्वरी नेताम , उमेंदी कोर्राम ,अगहन सिंह ठाकुर, नरेंद्र कुमार ध्रुव, महेंद्र नेताम ,यशवंत मरई ,गजेंद्र पुजारी ,हेमलाल ध्रुव ,पुनीत गोंड,दिनेश्वरी ध्रुव ,चंद्रिका ध्रुव, दुलारी ध्रुव, शैलेंन्द्री कुंजाम ,गौतम कुमार ध्रुव ,जितेंद्र नेताम ,धर्मेंद्र, गुलशन देव ,नरेंद्र कुमार ,,परम ध्रुव, खिलेश मरई, धर्मेंद्र ध्रुव ,लयन ध्रुव ,आनंदराम ध्रुव, राम कीर्तन ध्रुव, निलेश ध्रुव ,हेमलाल ध्रुव, धनीराम ,कोमल मंडावी, भोजराम ध्रुव टी वी मंडावी, पन्नू नेताम, भूपेंद्र नेताम, ललित मरकाम ,विवेकानंद कुंजाम ,डागेश्वर मंडावी, हेम नारायण सिंह ध्रुव, मोहन ध्रुव ,विष्णु नेताम आदिवासी प्रमुख उपस्थित थे।




