राजनांदगांव : स्वामी शंकराचार्य के देवलोकगमन पर शासकीय शोक घोषित ना किये जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिला शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलबीर सिंह छाबड़ा ने कहा कि शंकराचार्य का पद हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है, हिंदुओं का मार्गदर्शन एवं भगवत् प्राप्ति के साधन आदि विषयों में हिंदुओं को आदेश देने के विशेष अधिकार शंकराचार्यों को प्राप्त होते हैं।
जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी 1982 से 2022 तक द्वारकापीठ के शंकराचार्य थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके सम्मान में केंद्र में बैठी नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार न केवल असंवेदनशील रही बल्कि सरकार ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का अपमान भी किया। कुलबीर ने आरोप लगाते हुए कहा है कि एक ऐसे सन्यासी जो स्वतंत्रता सेनानी भी रहे उनके देह त्याग के बाद खुद को हिन्दुवादी कहने वाली भाजपा सरकार एक दिन का शोक भी व्यक्त नहीं कर पाई। सनातन धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में पूरे भारत ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूज्यपाद शंकराचार्य जी का धर्म के प्रति अमिट छाप है।
कुलबीर सिंह छाबड़ा ने उनके जीवन पर परिचय डालते हुए बताया कि जब भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाने की लड़ाई चल रही थी। जब 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा, तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 साल की उम्र में वह ‘क्रांतिकारी साधु‘ के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसी दौरान उन्होंने वाराणसी की जेल में 09 और मध्यप्रदेश की जेल में 06 महीने की सजा भी काटी। वे करपात्री महाराज की राजनीतिक दल राम राज्य परिषद के अध्यक्ष भी थे।
कुलबीर ने कहा कि खुद को हिन्दू धर्म का सेवक बताने वाली भाजपा वर्तमान सरकार वास्तव में सत्ता की लोभी है जिसने हिन्दुओं की भावनाओं का व्यापार कर अपनी कुर्सी बचाए रखी है। शंकराचार्य श्रद्देय स्वरूपानंद सरस्वती महाराज जी के निधन पर राष्ट्रीय शोक घोषित ना किया जाना पूरे हिंदू धर्म समुदाय का अपमान है पाखंडी हिंदू समर्थक मोदी और भाजपा को शर्म आनी चाहिए। सरकार एक तरफ हर घर तिरंगा मूवमेंट चला रही है।
दूसरी ओर भारत को पीड़ा देने वाले देश भारत का कोहिनूर हीरा जिसके कब्जे में है और जिसने भारत देश को गुलाब बना के रखा रहा उस ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के निधन में राष्ट्रीय शोक और राष्ट्रध्वज को झुकाकर भाजपाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेशियों की जी-हुजूरी कर रहे हैं और यह भाजपाई सरकार तिरंगे का अपमान कर रहें हैं जो आम जन भावनाओं की हत्या करने जैसा है।
सरकार के इस कृत्य पर हर भारतवासी क्षुब्ध है। महारानी एलिजाबेथ के लिए राष्ट्रीय ध्वज झुकाने वाली बीजेपी सरकार 99 साल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रद्रेय शंकराचार्य स्वरूपानंद महाराज के लिए एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं कर सकी। यह बेहद दुखद, पीडादायक और हिन्दू धर्मावलंबियो का अपमान है इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए।
देश में अंग्रेजों द्वारा दिए गए नाम व भवनों को मिटाकर देश के प्रति खुद को समर्पित दिखाने वाली यह सरकार वास्तव में ढोंगी है जो सिर्फ दिखावे में विश्वास करती है।
इनकी कथनी और करनी में फर्क है जबकि कांग्रेस शुरू से सभी धर्मों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है और प्रत्येक धर्म के धर्मावलंबियों का सम्मान करती है। कांग्रेस नौटंकी करके अपने कर्तव्य की पूर्ति नहीं करती बल्कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए देश में एकता बनाएं रखने के लिए सदैव प्रयासरत रही है और मौजूदा समय में भी श्री राहुल गांधी देश जोड़ने के लिए भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से रोज आम जनता से संवाद कर रहे हैं।
राजनांदगांव से दीपक साहू




