सनातन धर्म महासभा सेवा परिवार का गणेश समितियों से आग्रह – विघ्नहर्ता गणपति की मूर्तियां मूल स्वरूप में स्थापित करें

राजनांदगांव।
सनातन धर्म महासभा सेवा परिवार ने संस्कारधानी राजनांदगांव की सभी गणेश समितियों से विनम्र आग्रह किया है कि गणपति महोत्सव में भगवान गणेश की मूर्तियां मूल स्वरूप में स्थापित की जाएं तथा सनातन संस्कृति के अनुरूप ससम्मान विसर्जन किया जाए।
प्रदेश अध्यक्ष संतोष पटाक एवं जिला अध्यक्ष सौरभ खंडेलवाल ने बताया कि संस्कारधानी में गणेश उत्सव की परंपरा वर्षों पुरानी है। यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आकर धार्मिक, सांस्कृतिक व देशभक्ति की झांकी का आनंद लेते हैं। इस वर्ष भगवान गणपति का 11 दिवसीय महोत्सव 27 अगस्त से 6 सितंबर 2025 तक श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में गणेश जी का विशेष महत्व है। उन्हें प्रथम पूजनीय और विघ्नहर्ता माना जाता है। गणेश जी के 11 दिवसीय पूजन के दौरान समितियां पंडालों में धार्मिक भजन, गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करें, साथ ही अनुशासन व मर्यादा का विशेष ध्यान रखें।
सनातन धर्म महासभा सेवा परिवार ने यह भी स्मरण कराया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना को जाग्रत करने के लिए गणेश महोत्सव की शुरुआत की थी। इसीलिए यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।
जिला अध्यक्ष सौरभ खंडेलवाल ने कहा कि “मेरी संस्कृति, मेरा अभिमान” के तहत गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता गणपति का स्थापना मूल स्वरूप में की जाए और अनंत चतुर्दशी पर ही ससम्मान विसर्जन किया जाए। सभी श्रद्धालु बैंड, बाजा, धार्मिक गीत-संगीत और पारंपरिक वेशभूषा के साथ उत्सव को भक्ति और उल्लास के वातावरण में मनाएं।




