एक तरफ समिति प्रबंधकों और ऑपरेटरों की हड़ताल, दूसरी तरफ धान की तस्करी की समस्या..
गरियाबंद। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का शुरुआत तो की गई है किंतु तीन दिन बाद भी बहुत से उपार्जन केंद्रों में खरीदी का काम सुचारू रूप से नही हो पा रहा है। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों के उपार्जन केंद्रों में 17 नवम्बर तक खरीदी कार्य प्रारम्भ नही हो सका है।

इधर जिले के कलेक्टर बी.एस.उइके ने कहा है कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शासन की महत्वपूर्ण प्राथमिकता में है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही अथवा अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगी । उन्होंने कहा कि किसानो की धान खरीदी को राज्य शासन ने अत्यावश्यक सेवा अधिनियम एस्मा के तहत शामिल किया है, अतः धान खरीदी में संलग्न कर्मचारी की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुये एफआईआर की कार्रवाई की जायेगी।

इस क्षेत्र में धान बेचने की तैय्यारी कर कुछ किसानों के साथ ग्राम गुरजीभाटा के मोहित कुमार यादव ने बताया कि उन्हें एग्रिस्टेक पंजीयन में परेशानी हो रही है। ऐसे किसान जिनकी दो गांव में जमीन है, उनका एग्रिस्टेक पंजीयन एक ही गांव का दिखा रहा है।
एक तरफ समिति प्रबंधकों और कम्प्यूटर ऑपरेटर की हड़ताल ने खरीदी को प्रभावित किया हुआ है, वही दूसरी तरफ ओडिशा सीमा से लगे देवभोग और मैनपुर विकासखंडों में अवैध धान का परिवहन और भंडारण या साफ शब्दों में कहे कि धान की तस्करी चरम पर है।
वैसे शासन स्तर पर धान खरीदी 15 नवंबर से प्रारंभ की गई, किन्तु मिली जानकारी के अनुसार मैनपुर और देवभोग ब्लॉक के कुछ बिचौलिये, दीवाली के पहले से ही ओडिसा से धान लाकर अवैध भंडारण में लगे हुये थे, प्रशासनिक स्तर पर कुछ कार्यवाहियां भी कभी कभार की जाती है, किन्तु लगता है कि ये कार्यवाही केवल खानापूर्ति साबित होती है, इससे धान का अवैध व्यापार या तस्करी रोक पाना मुश्किल है।

पिछले दिनों मैनपुर एसडीएम तुलसीदास मरकाम ने ग्राम धनोरा में ऐसे ही अवैध भंडारण पर कार्यवाही की थी। इसमें संलिप्त लोग एक दूसरे के नाम पर ठीकरा फोड़ते रहे, किन्तु अंत में किसी विक्की का नाम आया था।
गरियाबंद जिले में धान तस्करी का खेल इससे होने वाले तगड़े मुनाफे की वजह से किया जाता है, इसका मुख्य कारण धान का समर्थन मूल्य के साथ कुल मिलाकर प्रति एकड़ 3100 रु मिलने वाली कृषि आदान राशि है। धान के समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस की ये राशि प्रति क्विंटल लगभग 740 ₹ से 760 ₹ तक केंद्र शासन द्वारा दी जाती है।
एक कारण ये भी है कि छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़, 21 क्विंटल धान खरीदा जाता है, किन्तु मैनपुर और देवभोग ब्लॉक में धान की उपज प्रति एकड़ औसत 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ है। इन दोनों ब्लॉक में धान के अतिरिक्त मक्के का भी उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।

इसीलिये प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की पूर्ति के लिये ओडिसा का धान कम मूल्य पर यहां अवैध परिवहन कर लाया जाता है,चूंकि ओडिसा में धान का उत्पादन अधिक है,और यहां कम, मैनपुर ब्लॉक के ध्रुवागुड़ी गोहरापदर अमलिपदर उरमाल तेतलखुंटी से लेकर देवभोग ब्लॉक के अनेक तथाकथित व्यापारी धान की अफरा-तफरी में लिप्त हैं।




